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कबाड़ में तब्दील करोड़ों की सिटी बसें, 20 में से सिर्फ 4 सड़कों पर, जनता निजी वाहनों पर निर्भर

रायगढ़। शहरवासियों को सस्ती, सुगम और बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये की लागत से शुरू की गई,सिटी बस सेवा आज बदहाली का शिकार हो चुकी है,देखरेख और रखरखाव के अभाव में अधिकांश बसें कबाड़ में तब्दील हो गई हैं,हालात यह हैं कि 20 सिटी बसों के बेड़े में से वर्तमान में केवल 4 बसों का ही संचालन हो रहा है, जबकि शेष बसें वर्षों से खड़ी-खड़ी जर्जर हो चुकी हैं।



रायगढ़ में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से सिटी बस सेवा शुरू की गई थी,वर्ष 2017 में स्थानीय प्रशासन के प्रयासों से नगर निगम रायगढ़ को यह बसें उपलब्ध कराई गई थीं,इन बसों के माध्यम से रायगढ़ से घरघोड़ा, तमनार, सारंगढ़, सरिया, पुसौर और एनटीपीसी क्षेत्र तक आने-जाने वाले यात्रियों को बड़ी सुविधा मिल रही थी,लेकिन कोरोना काल के दौरान बसों का संचालन बंद हो गया और इसके बाद उचित रखरखाव नहीं होने से बसों की स्थिति लगातार खराब होती चली गई, लंबे समय तक खड़ी रहने के कारण बसों के कई महत्वपूर्ण पार्ट्स चोरी हो गए,पहिए, सीटें, स्टेयरिंग सहित कई महंगे उपकरण गायब हो गए, जिससे अधिकांश बसें कंडम स्थिति में पहुंच गईं।



नगर निगम द्वारा हाल ही में 4 बसों को दोबारा सड़क पर उतारने के लिए करीब 90 लाख रुपये खर्च किए गए हैं,वहीं कई बसों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि उनकी मरम्मत करना भी आर्थिक रूप से व्यवहारिक नहीं माना जा रहा है, विशेषज्ञों का मानना है कि सभी बसों को फिर से चालू करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं।



सिटी बस सेवा ठप होने का सीधा असर आम यात्रियों पर पड़ा है, अब शहर और आसपास के क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को निजी बसों और अन्य निजी परिवहन साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है,यात्रियों का आरोप है कि निजी संचालकों द्वारा मनमाना किराया वसूला जा रहा है, जिससे उन्हें अधिक खर्च उठाना पड़ रहा है,हालांकि नगर निगम का कहना है कि शेष बसों के संचालन और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जल्द निर्णय लिया जाएगा, लेकिन जिस स्थिति में अधिकांश बसें पहुंच चुकी हैं, उसे देखते हुए उनके दोबारा संचालन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।



सबसे बड़ा सवाल यह है कि जनता के टैक्स और सरकारी खजाने से खर्च किए गए करोड़ों रुपये की इस परियोजना का ऐसा हश्र आखिर क्यों हुआ? यदि समय पर रखरखाव और सुरक्षा के उचित इंतजाम किए जाते तो शायद आज यह बसें लोगों की सेवा कर रही होतीं, अब देखना होगा कि नगर निगम और प्रशासन इस सार्वजनिक संपत्ति को बचाने और शहरवासियों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आगे क्या कदम उठाते हैं।




करोड़ों रुपये की लागत से शुरू हुई सिटी बस सेवा आज बदहाली और उपेक्षा की कहानी बयां कर रही है, जनता जवाब चाहती है कि आखिर इस सार्वजनिक संपत्ति को कबाड़ बनने से रोकने की जिम्मेदारी किसकी थी, और इस नुकसान की भरपाई कौन करेगा….?

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