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तमनार जनसुनवाई पर उठे सवाल: “SECL मुखौटा, अडानी रिमोट कंट्रोल”, किसानों की आवाज दबाने के आरोप

तमनार/रायगढ़। पेलमा खदान परियोजना को लेकर आयोजित पर्यावरण जनसुनवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं,स्थानीय ग्रामीणों और जनसुनवाई से जुड़े सूत्रों का आरोप है कि कागजों में यह जनसुनवाई भारत सरकार की महारत्न कंपनी SECL की परियोजना के लिए आयोजित की गई थी, लेकिन पूरे कार्यक्रम का संचालन और नियंत्रण निजी प्रबंधन के प्रभाव में दिखाई दिया, विरोध करने वाले ग्रामीणों का कहना है कि यह जनसुनवाई एक निष्पक्ष लोकतांत्रिक प्रक्रिया के बजाय “स्क्रिप्टेड शो” बनकर रह गई, जहां वास्तविक प्रभावितों की आवाज दबा दी गई।



बाउंसरों की मौजूदगी पर सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि जनसुनवाई स्थल पर बड़ी संख्या में पुरुष और महिला बाउंसर तैनात किए गए थे, स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां किसानों और उनके समर्थकों को “बाहरी” बताकर रोकने की कोशिश की गई, वहीं निजी सुरक्षा कर्मियों को खुली छूट दी गई, कई लोगों ने दावा किया कि कार्यक्रम स्थल पर ऐसा माहौल बना दिया गया था, जिससे विरोध दर्ज कराने वाले ग्रामीण असहज महसूस कर रहे थे।

पुलिस की भूमिका पर भी उठे प्रश्न

कुछ ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जनसुनवाई से पहले गांवों में बैठकों और बाहरी लोगों के प्रवेश को लेकर सख्ती बरती गई, आलोचकों का कहना है कि प्रशासन की भूमिका निष्पक्ष मध्यस्थ की बजाय आयोजन प्रबंधन जैसी नजर आई,हालांकि, प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।



“प्लांटेड” भाषणों का आरोप

सूत्रों के मुताबिक जनसुनवाई के दौरान सीमित संख्या में कुछ वक्ताओं ने लंबा समय लिया, जिससे बड़ी संख्या में उपस्थित ग्रामीणों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल सका, विरोध करने वाले पक्ष का आरोप है कि समर्थन में बोलने वाले कई लोग परियोजना से जुड़े कर्मचारी या ठेका श्रमिक थे, जिन्हें भीड़ और समर्थन दिखाने के उद्देश्य से लाया गया था। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।



दोहरे मापदंड का आरोप

विरोध कर रहे ग्रामीणों ने प्रशासन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है, उनका कहना है कि वर्ष 2022 में अभिनेता अक्षय कुमार के खदान क्षेत्र में फिल्म शूटिंग के लिए आने पर प्रशासन ने पूरी सुविधाएं उपलब्ध कराईं, जबकि आज अपनी जमीन और आजीविका को लेकर चिंतित ग्रामीणों को विभिन्न प्रतिबंधों और सुरक्षा घेरों का सामना करना पड़ रहा है।

पर्यावरण और विस्थापन का मुद्दा

पेलमा खदान परियोजना का विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि यह सिर्फ जमीन अधिग्रहण का मामला नहीं, बल्कि पर्यावरण, जल स्रोतों, कृषि और स्थानीय समुदायों के भविष्य से जुड़ा विषय है, उनका आरोप है कि जनसुनवाई में इन मुद्दों पर गंभीर चर्चा के बजाय औपचारिकता निभाई गई।

निष्पक्ष जांच की मांग

ग्रामीणों और विरोध कर रहे संगठनों ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, उनका कहना है कि यदि पर्यावरण जनसुनवाई जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में प्रभावित लोगों को खुलकर अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिलता, तो ऐसी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।

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