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NTPC लारा स्टेज-3 विस्तार का ग्रामीणों ने किया विरोध, बोले— पहले पुराने वादे पूरे करो, फिर विस्तार की बात करो

रायगढ़। NTPC लारा सुपर थर्मल पावर स्टेशन के तृतीय चरण (स्टेज-3) विस्तार को लेकर पुसौर क्षेत्र में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। क्षेत्र के ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी को आपत्ति पत्र सौंपते हुए, प्रस्तावित विस्तार की पर्यावरणीय स्वीकृति पर पुनर्विचार की मांग की है, ग्रामीणों का कहना है कि स्टेज-1 और स्टेज-2 के दौरान किए गए सामाजिक एवं पर्यावरणीय वादे आज तक पूरे नहीं हुए हैं, ऐसे में नए विस्तार को मंजूरी देना उचित नहीं होगा।



ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि संयंत्र स्थापना के समय NTPC द्वारा क्षेत्र में आधुनिक अस्पताल, विशेषज्ञ चिकित्सकों की सुविधा, सस्ती चिकित्सा सेवाएं तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का वादा किया गया था, लेकिन आज तक इन सुविधाओं का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया है, उनका कहना है कि परियोजना के कारण क्षेत्र में महंगाई बढ़ी है, जबकि स्थानीय लोगों को रोजगार के पर्याप्त अवसर भी नहीं मिले हैं।



ग्रामीणों ने फ्लाई ऐश प्रदूषण को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है,उनका आरोप है कि संयंत्र से निकलने वाली फ्लाई ऐश के कारण कृषि भूमि, जल स्रोतों और वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है,ग्रामीणों का दावा है कि हजारों एकड़ खेती प्रभावित हुई है, जिससे किसानों की आजीविका पर असर पड़ा है।



16 जून को होगी स्टेज-3 की जनसुनवाई

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने NTPC लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट के स्टेज-3 विस्तार के लिए 16 जून 2026 को जनसुनवाई निर्धारित की है,यह जनसुनवाई सुबह 11 बजे ग्राम महलोई स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के समीप मैदान में आयोजित की जाएगी।



भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार NTPC लारा की वर्तमान 3200 मेगावाट क्षमता को बढ़ाकर 4800 मेगावाट किया जाना प्रस्तावित है, विस्तार परियोजना का प्रभाव तहसील पुसौर के अरमुडा, छपोरा, बोडाझरिया, महलोई, रियापाली, कांडागढ़, देवलपुरा, घुटकूपाली, थेंगापाली और लारा सहित कई गांवों पर पड़ेगा।



ग्रामीणों की चार प्रमुख मांगें

ग्रामीणों ने पर्यावरण मंडल को सौंपे गए आवेदन में चार प्रमुख मांगें रखी हैं—

स्टेज-3 की पर्यावरणीय स्वीकृति पर पुनर्विचार किया जाए।

पूर्व चरणों में किए गए वादों और शर्तों की स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए।

स्थानीय नागरिकों की आपत्तियों को विधिवत दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए।

पूर्व चरणों के सामाजिक एवं पर्यावरणीय दायित्वों के संतोषजनक पालन तक नई स्वीकृतियां स्थगित रखी जाएं।


ग्रामीणों ने आवेदन में कहा है कि वे अपने बच्चों और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित एवं स्वस्थ भविष्य के हित में यह मांग कर रहे हैं तथा जनहित और पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दिए जाने की अपेक्षा रखते हैं,आवेदन की प्रतिलिपि रायगढ़ कलेक्टर को भी भेजी गई है।



रुंगटा संस की जनसुनवाई के बीच बढ़ा विरोध

पुसौर क्षेत्र में 2 जुलाई को रुंगटा संस के विस्तार परियोजना की भी जनसुनवाई प्रस्तावित है, NTPC लारा से प्रभावित होने का दावा कर रहे ग्रामीण पहले से ही रुंगटा परियोजना का विरोध कर रहे हैं, अब NTPC के स्टेज-3 विस्तार की जनसुनवाई को लेकर भी विरोध तेज हो गया है, ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र पहले से औद्योगिक परियोजनाओं के प्रभाव झेल रहा है,और बिना पुराने मुद्दों का समाधान किए नए विस्तार को स्वीकार नहीं किया जाएगा।



ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो 16 जून की जनसुनवाई में व्यापक विरोध देखने को मिल सकता है। उनका कहना है, “एक NTPC ने ही क्षेत्र को काफी नुकसान पहुंचाया है, अब उसका विस्तार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

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