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पेलमा कोल ब्लॉक जनसुनवाई से पहले ग्रामीणों में आक्रोश, मुआवजा और विस्थापन पर जवाब मांग रहे प्रभावित परिवार

रायगढ़। तमनार ब्लॉक के पेलमा कोल ब्लॉक परियोजना को लेकर आगामी 8 जून को प्रस्तावित पर्यावरण जनसुनवाई से पहले प्रभावित गांवों में असंतोष और आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है, पेलमा, उरबा, लालपुर, हिंजर, मिलूपारा सहित आठ प्रभावित गांवों के ग्रामीण जमीन की कीमत, विस्थापन, रोजगार और मुआवजे को लेकर प्रशासन से स्पष्ट लिखित आश्वासन की मांग कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना से प्रभावित परिवारों ने समय-समय पर एसडीएम और कलेक्टर को कई ज्ञापन सौंपे हैं, 18 मई, 1 जून और 2 जून को भी बड़ी संख्या में ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचकर अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन दे चुके हैं, इसके बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल या बैठक आयोजित नहीं की गई है, ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें केवल मौखिक आश्वासन दिए गए, जबकि वे मुआवजा, नौकरी और पुनर्वास संबंधी गारंटी लिखित रूप में चाहते हैं।



ग्रामीणों के अनुसार, भारी विरोध के बाद जनसुनवाई की तिथि 19 मई से बढ़ाकर 8 जून की गई थी, लेकिन इस अतिरिक्त समय का उपयोग भी प्रशासन द्वारा समस्याओं के समाधान के लिए नहीं किया गया,प्रभावित परिवारों का कहना है कि जब तक मुआवजा निर्धारण, पुनर्वास और रोजगार संबंधी मुद्दों पर स्पष्ट निर्णय नहीं होता, तब तक जनसुनवाई का कोई औचित्य नहीं है।



सामान लौटाकर जताया विरोध

परियोजना को लेकर ग्रामीणों के बीच अविश्वास का एक कारण खदान संचालन से जुड़ी व्यवस्थाएं भी बताई जा रही हैं,ग्रामीणों का कहना है कि हाल ही में कंपनी प्रबंधन की ओर से गांवों में कुछ आवश्यक सामग्री वितरित की गई थी, जिसे प्रभावित लोगों ने स्वीकार करने से इनकार करते हुए,रायगढ़ कलेक्ट्रेट में वापस जमा करा दिया, साथ ही इस संबंध में लिखित शिकायत भी प्रशासन को सौंपी गई,ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने जल, जंगल और जमीन के मुद्दे पर किसी भी प्रकार के प्रलोभन को स्वीकार नहीं करेंगे, और उनकी प्राथमिकता अपने अधिकारों की रक्षा है।



क्या मांगें पूरी होने से पहले होगी जनसुनवाई….?

प्रभावित ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में एक समान जमीन दर निर्धारित करना, दो एकड़ भूमि पर एसईसीएल में स्थायी नौकरी तथा भूमिहीन प्रभावित परिवारों को भी उचित मुआवजा और पुनर्वास लाभ देना शामिल है, ग्रामीणों का सवाल है कि जब इन मांगों पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है, तो जनसुनवाई आयोजित करने का उद्देश्य क्या है।



स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि उनकी मांगों पर पहले स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया तो जनसुनवाई केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी,उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जनसुनवाई से पहले सभी प्रभावित परिवारों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए, लिखित गारंटी और मुआवजा संबंधी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जाए।



प्रशासन से जवाब की प्रतीक्षा

ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास की कीमत पर अपने अधिकारों और भविष्य से समझौता नहीं कर सकते, अब सबकी नजर 8 जून की प्रस्तावित जनसुनवाई पर टिकी है, जहां यह स्पष्ट होगा कि प्रशासन प्रभावित लोगों की चिंताओं का समाधान करता है या फिर विरोध और तेज होता है।

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