पखांजूर। नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ ही पखांजूर क्षेत्र के सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति सामने आ गई है, क्षेत्र के कई स्कूलों में बच्चों को बुनियादी सुविधाओं के अभाव में तिरपाल, कचरा शेड और अस्थायी झोपड़ियों के नीचे बैठकर पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है,क्षेत्र के ढोरकट्टा गांव में जर्जर स्कूल भवन और वर्षों से लंबित मांगों को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा, नए सत्र के पहले ही दिन ग्रामीणों ने स्कूल में तालाबंदी कर प्रशासन और शिक्षा विभाग के खिलाफ विरोध दर्ज कराया,ग्रामीणों का कहना है कि कई बार मांग करने के बावजूद स्कूल भवन की मरम्मत या नए भवन निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

वहीं बंगोधोड़िया गांव में हालात और भी चिंताजनक हैं,यहां बच्चों की कक्षाएं कचरा शेड में संचालित की जा रही हैं,ग्रामीणों का आरोप है कि पुराने स्कूल भवन पर मजदूरों का कब्जा है, जिसके कारण विद्यार्थियों को सुरक्षित और उचित शिक्षण वातावरण नहीं मिल पा रहा है,ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग और प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए,कहा कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, उनका कहना है कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और सुविधाएं बढ़ाने के दावे कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात बेहद खराब हैं।

ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रभावित स्कूलों के लिए जल्द से जल्द नए भवनों का निर्माण कराया जाए तथा विद्यार्थियों को आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वे सुरक्षित और बेहतर माहौल में शिक्षा प्राप्त कर सकें,फिलहाल क्षेत्र में स्कूलों की बदहाली और ग्रामीणों के विरोध ने शिक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।




