रायगढ़ में अफीम खेती पर बड़ा खुलासा: ‘संगठित गिरोह’ नहीं, अज्ञानता भी बनी वजह — प्रशासन ने दी सख्त चेतावनी

रायगढ़। जिले के तमनार और लैलूंगा ब्लॉक में हाल ही में मिली अवैध अफीम (Opium) की खेती को लेकर सोमवार को कलेक्टर और एसएसपी शशि मोहन सिंह ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की इस दौरान पुलिस और प्रशासन ने साफ किया कि अब तक की जांच में किसी बड़े संगठित गिरोह (Organized Syndicate) की भूमिका सामने नहीं आई है।



छिटपुट और असंगठित रूप में हो रही खेती

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएसपी मयंक मिश्रा ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में तमनार के आमाघाट में 60,326 पौधे, लैलूंगा के नवीन घटगांव में 2 डिसमिल और मुड़ागांव में 5 डिसमिल क्षेत्र में अफीम की खेती पकड़ी गई है,उन्होंने स्पष्ट किया कि यह खेती किसी बड़े नेटवर्क के तहत नहीं, बल्कि अलग-अलग स्थानों पर असंगठित तरीके से की जा रही है,ये खेत ज्यादातर नदी-नालों के किनारे और सुदूर सीमावर्ती इलाकों में पाए गए हैं।



‘अज्ञानता’ भी बनी बड़ी वजह

सीएसपी ने बताया कि कई मामलों में ग्रामीणों को यह तक पता नहीं था कि वे जिस फसल को उगा रहे हैं, वह प्रतिबंधित अफीम है,‘लैक ऑफ नॉलेज’ और जागरूकता की कमी इस समस्या की बड़ी वजह बनकर सामने आई है।

मयंक चतुर्वेदी कलेक्टर रायगढ़

पुलिस का जागरूकता अभियान तेज

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के तहत मुखबिर तंत्र को सक्रिय कर दिया है,
गांव के कोटवार, सरपंच और जनप्रतिनिधियों के व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर लोगों को अफीम के पौधे की पहचान सिखाई जा रही है, ताकि वे समय रहते इसकी जानकारी प्रशासन को दे सकें।

शशि मोहन सिंह वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रायगढ़



ड्रोन से निगरानी, सख्त कार्रवाई की चेतावनी

प्रशासन ने साफ किया है कि जिले में ड्रोन (Drone) के जरिए निगरानी की जा रही है,कलेक्टर और एसएसपी के निर्देशन में ग्रामीणों से अपील की गई है कि यदि किसी ने अज्ञानतावश अफीम की फसल लगा ली है, तो वे तुरंत उसे स्वयं नष्ट कर दें,प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि जांच या ड्रोन सर्वे में यह फसल पाई जाती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ NDPS Act के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।