मार्च में लौटी ठंड! उत्तरी छत्तीसगढ़ में पश्चिमी विक्षोभ का असर, बारिश-ओलों से तापमान में गिरावट, फसलें संकट में

अंबिकापुर/सरगुजा।छत्तीसगढ़ के उत्तरी हिस्सों में पिछले एक सप्ताह से सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ ने मार्च के महीने में ही सर्दी का अहसास करा दिया है, संभाग मुख्यालय अंबिकापुर समेत सरगुजा संभाग के कई जिलों में तेज बारिश और ओलावृष्टि के चलते तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि यह बदलाव अभी थमने वाला नहीं है, और अप्रैल के पहले सप्ताह में मौसम एक बार फिर करवट ले सकता है।



24 घंटे में 4 डिग्री लुढ़का पारा
बीते 24 घंटों के भीतर अंबिकापुर के न्यूनतम तापमान में करीब 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है, तापमान 16 डिग्री से गिरकर लगभग 12 डिग्री तक पहुंच गया है, वहीं, पिछले चार दिनों में न्यूनतम तापमान में कुल 8 डिग्री तक की कमी आई है। अधिकतम तापमान भी 30 डिग्री के नीचे बना हुआ है, मार्च के अंतिम दौर में ठंड की वापसी ने लोगों को सुबह-शाम हल्के गर्म कपड़े पहनने पर मजबूर कर दिया है।



ओलावृष्टि से रबी फसलों पर संकट
पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती परिसंचरण की दोहरी सक्रियता का सबसे अधिक असर कृषि क्षेत्र पर पड़ा है,मैनपाट, बलरामपुर, रामानुजगंज और कुसमी जैसे इलाकों में तेज हवाओं के साथ हुई ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। गेहूं की तैयार फसल और सब्जी वर्गीय फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है, यह समय गेहूं की कटाई का होता है, ऐसे में बार-बार बदलते मौसम ने किसानों की मेहनत पर पानी फेरने की आशंका पैदा कर दी है।


अप्रैल में फिर बदलेगा मौसम
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा सिस्टम के कमजोर पड़ने के बाद कुछ दिनों के लिए मौसम साफ रहेगा, और तापमान में बढ़ोतरी होगी, हालांकि यह राहत ज्यादा दिन टिकने वाली नहीं है,मार्च के अंतिम दिनों और अप्रैल के पहले सप्ताह में एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे उत्तरी छत्तीसगढ़ में एक बार फिर गरज-चमक के साथ बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है।


सतर्क रहने की सलाह
मौसम विभाग ने किसानों और आम नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है, विशेष रूप से किसानों को फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय करने और मौसम अपडेट पर नजर बनाए रखने की हिदायत दी गई है।