रायगढ़ में फिर फूटा ‘अफीम कनेक्शन’: तीन दिन में दूसरा बड़ा खुलासा, लैलूंगा बना नया हॉटस्पॉट

रायगढ़। छत्तीसगढ़ का सीमावर्ती जिला रायगढ़ इन दिनों अवैध अफीम की खेती का नया केंद्र बनता जा रहा है, लैलूंगा इलाके में महज तीन दिनों के भीतर अफीम की खेती का दूसरा बड़ा मामला सामने आने से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है,अभी 21 मार्च को तमनार के आमाघाट क्षेत्र में करीब डेढ़ एकड़ में लहलहाती लगभग 2 करोड़ रुपये मूल्य की अफीम की फसल पकड़ी गई थी।

इस कार्रवाई की गूंज थमी भी नहीं थी कि अब लैलूंगा ब्लॉक के ग्राम घटगांव (नवीन घटगांव) में अवैध अफीम की खेती का नया खुलासा हो गया है,विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के बाद जिला मुख्यालय से पुलिस, राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम मौके के लिए रवाना हो चुकी है, लैलूंगा पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंच गई है, बताया जा रहा है कि सब्जी की बड़ी में दो-तीन स्थानों पर अफीम की खेती की गई थी, जबकि कुछ पौधों को पहले ही उखाड़कर बेचा जा चुका है,प्रारंभिक सूचना के अनुसार नवीन घटगांव में अफीम की बुवाई बड़े स्तर पर की गई है,अधिकारियों की टीम के मौके पर पहुंचने के बाद ही खेती के वास्तविक रकबे और पौधों की संख्या का आधिकारिक खुलासा हो सकेगा।



तीन दिन में दूसरा मामला, उठे गंभीर सवाल
आमाघाट में करोड़ों की अफीम मिलने के बाद से ही जिले की इंटेलिजेंस व्यवस्था और स्थानीय सूचना तंत्र सवालों के घेरे में था। अब नवीन घटगांव में दोबारा इसी तरह की अवैध फसल मिलने से यह आशंका और मजबूत हो गई है कि क्षेत्र में कोई बड़ा अंतर्राज्यीय ड्रग सिंडिकेट सक्रिय है।

वीडियो वायरल होते ही हरकत में आया प्रशासन
मामले को तब और तूल मिला जब भाजपा नेता रवि भगत ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर ग्राम नवीन घटगांव में अफीम की फसल का वीडियो साझा किया, वीडियो में अवैध खेती के स्पष्ट प्रमाण सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस विभाग तुरंत हरकत में आ गया और टीम को मौके के लिए रवाना किया गया।


17 दिनों में पांचवां मामला, गहराता ‘नशे का नेटवर्क’
छत्तीसगढ़ में नशे के अवैध कारोबार की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 17 दिनों में अफीम की खेती पकड़े जाने का यह पांचवां मामला हैं।

इससे पहले 7 मार्च को दुर्ग, 10 और 12 मार्च को बलरामपुर जिले के कुसमी और कोरंधा, और 21 मार्च को रायगढ़ के तमनार में बड़ी कार्रवाई हो चुकी है,लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने कानून-व्यवस्था और खुफिया तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि इस ‘काले साम्राज्य’ के पीछे कौन लोग हैं और प्रशासन इस पर कितनी प्रभावी कार्रवाई कर पाता है।