रायगढ़/गेजामुड़ा। रायगढ़ जिले के ग्राम गेजामुड़ा में अडानी की रेलवे लाइन परियोजना को लेकर चल रहा विवाद अब खुली टकराव की स्थिति में पहुंच गया है,रविवार को प्रशासन और ग्रामीणों के बीच हुई वार्ता पूरी तरह विफल होते ही गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया,और भारी सुरक्षा के बीच जबरन निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया।

100% बनाम 50%: मुआवजे पर अड़ी लड़ाई
ग्रामीणों ने साफ मांग रखी कि उनकी जमीन का 100% मुआवजा दिया जाए और कथित तौर पर झूठे मामले में गिरफ्तार युवक ऋषि पटेल को तुरंत रिहा किया जाए,
वहीं Adani Group का प्रबंधन केवल 50% मुआवजे पर अड़ा रहा।
इस टकराव के चलते बातचीत बेनतीजा खत्म हो गई और किसानों ने दो टूक कहा— “जान दे देंगे, जमीन नहीं देंगे।”
पुलिस छावनी में बदला गांव, ‘बाउंसरों’ की एंट्री
वार्ता विफल होते ही हालात तेजी से बदले। गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया,सूत्रों के मुताबिक, कंपनी की ओर से बड़ी संख्या में निजी बाउंसरों को भी लाया गया, जिनकी मौजूदगी में मशीनों के साथ रेल लाइन का काम शुरू करा दिया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि:
प्रशासन ने पूरी तरह कंपनी का साथ दिया
किसानों को उनकी ही जमीन से दूर कर दिया गया
विरोध की हर आवाज को दबाने की कोशिश हुई

विरोध पर सख्ती: महिलाएं और बुजुर्ग भी हिरासत में
जब ग्रामीण, महिलाएं और बुजुर्ग अपने खेत बचाने के लिए आगे आए, तो पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए दर्जनभर से अधिक लोगों को हिरासत में ले लिया,प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लोगों को जबरन गाड़ियों में भरकर ले जाया गया।
गांव में तनाव, दहशत का माहौल
गेजामुड़ा इस वक्त पूरी तरह तनाव में है,दो दिनों में हुई लगातार कार्रवाई के बाद ग्रामीणों में डर और आक्रोश दोनों है,स्थानीय लोगों का कहना है कि अब यह सिर्फ जमीन का मामला नहीं, बल्कि सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई बन चुकी है।

साफ संदेश: “जो विरोध करेगा, वही निशाने पर”
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन का रुख साफ है—
कंपनी के काम में बाधा डालने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी, जैसा कि ऋषि पटेल के मामले में देखा गया,कुल मिलाकर, गेजामुड़ा में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं,यह संघर्ष अब केवल मुआवजे का नहीं, बल्कि जमीन, अधिकार और प्रशासनिक शक्ति के टकराव का प्रतीक बनता जा रहा है।









