छुईखदान केसीजी। चंद्राकार समाज द्वारा चंद्राकर भवन में छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती बड़े हर्षोल्लास एवं श्रद्धा के साथ मनाई गई,कार्यक्रम की शुरुआत तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर की गई, जिसके बाद उपस्थितजनों ने वीर शिवाजी को श्रद्धा सुमन अर्पित किए,इस अवसर पर समाज के अध्यक्ष योगेश चंद्राकर ने कहा कि सामाजिक एकता बनाए रखने के लिए सभी को शिवाजी महाराज के बताए मार्ग पर चलना चाहिए। उनके आदर्श, मूल्य और न्यायप्रिय शासन प्रणाली आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं,उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज केवल एक महान योद्धा ही नहीं, बल्कि एक कुशल और न्यायप्रिय शासक भी थे।

कार्यक्रम में दीपक देशमुख ने अपने उद्बोधन में शिवाजी महाराज के जीवन पर प्रकाश डालते हुए,बताया कि उनका जन्म 19 फरवरी 1630 को महाराष्ट्र के पुणे के निकट एक जमींदार कुर्मी परिवार में हुआ था,उन्होंने कम उम्र में ही तोरण किला फतह कर अपने सैन्य अभियानों की शुरुआत की और गोरिल्ला युद्ध नीति से मुगलों की बड़ी सेनाओं को परास्त किया।
उन्होंने बताया कि शिवाजी महाराज के राज्य में महिलाओं और किसानों को विशेष सम्मान प्राप्त था, उनकी माता जिजाबाई धार्मिक एवं अनुशासित महिला थीं, जिनका उनके व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव पड़ा। वर्ष 1674 में रायगढ़ किला में राज्याभिषेक के बाद वे छत्रपति कहलाए,शुभम चंद्राकर ने कहा कि भारतीय इतिहास में छत्रपति शिवाजी महाराज को एक न्यायप्रिय, सहिष्णु एवं राष्ट्रप्रेमी शासक के रूप में सदैव याद किया जाएगा।

कार्यक्रम का संचालन समाज के वरिष्ठ सदस्य अशोक चंद्राकर ने किया। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष रामकुमार चंद्राकर, लल्लू चंद्राकर, धन्नु चंद्राकर, पवन चंद्राकर, रामकुमार सहित बड़ी संख्या में चंद्राकर समाज के महिला-पुरुष एवं बच्चे उपस्थित रहे,कार्यक्रम का समापन राष्ट्रप्रेम एवं सामाजिक एकता के संदेश के साथ किया गया।










