1200 हेक्टेयर में कोयला खदान सर्वे का पत्र सामने आते ही भड़का ग्रामीणों का आक्रोश ….जोबी, रेलो, बर्रा, कुर्रू-करूवाडीह और नागोई गांव प्रभावित…. ग्रामीणों ने योजना तत्काल निरस्त करने की उठाई मांग

खरसिया/ रायगढ़ । क्षेत्र में प्रस्तावित कोयला खदान को लेकर जारी एक आधिकारिक पत्र सामने आने के बाद प्रभावित गांवों में आक्रोश की ज्वाला भड़क उठी है। पत्र में डीजीपीएस सर्वे के लिए लगभग 1200 हेक्टेयर क्षेत्र का उल्लेख किया गया है, जिसमें ग्राम जोबी, रेलो, बर्रा, कुर्रू-करूवाडीह और नागोई को प्रभावित क्षेत्र बताया गया हैं,जैसे ही यह पत्र बाहर आया, इन गांवों के ग्रामीण एक्शन में आ गए और विरोध शुरू कर दिया, ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से इस योजना को तत्काल निरस्त करने की मांग तेज कर दी है,पत्र के अनुसार भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (BALCO) द्वारा बर्रा कोल ब्लॉक के लिए सर्वे कार्य प्रस्तावित है, इसमें वन भूमि के उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया के तहत डीजीपीएस सर्वे कराया जाना है, ताकि खदान क्षेत्र की सीमाएं और वन क्षेत्र का आकलन किया जा सके, सर्वे कार्य वन संरक्षण अधिनियम 1980 के प्रावधानों के अंतर्गत प्रस्तावित बताया गया है,और संबंधित अधिकारियों को सर्वे में सहयोग करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

मामला सामने आने के बाद प्रभावित गांवों के ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है, ग्रामीणों का कहना है कि पहले ही क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों का असर पर्यावरण और आजीविका पर पड़ा है। ऐसे में नए खदान क्षेत्र के सर्वे की खबर से लोगों में भय और असंतोष बढ़ गया है, कई स्थानों पर ग्रामीणों ने बैठकें कर विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है,और प्रशासन को ज्ञापन देकर आगे की रणनीति की तैयारी भी की जा रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि यदि खदान खुलता है तो खेती, जल स्रोत और वन आधारित आजीविका पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित योजना को तत्काल निरस्त किया जाए, और प्रभावित गांवों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए स्पष्ट निर्णय लिया जाए,फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में माहौल गर्म है,और ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता तब तक विरोध जारी रहेगा।