NTPC Limited के खिलाफ किसानों का बड़ा आंदोलन……आठ गांवों के ग्रामीण 21वें दिन भी धरने पर, 15 दिन का अल्टीमेटम

रायगढ़। घरघोड़ा क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास की अनदेखी से नाराज आठ गांवों के किसान पिछले 21 दिनों से लगातार शांतिपूर्ण धरने पर बैठे हुए हैं, ग्राम तिलाईपाली के ऊपरपारा में चल रहे इस आंदोलन में तिलाईपाली, कुधुरमौहा, नयारामपुर, चोटीगुड़ा, साल्हेपाली, अजीतगढ़ सहित चार पंचायतों के अंतर्गत आने वाले गांवों के ग्रामीण शामिल हैं।

किसान प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक धरना प्रदर्शन कर प्रशासन और एनटीपीसी प्रबंधन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं,ग्रामीणों ने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपते हुए शीघ्र समाधान की मांग की है।


अब तक नहीं मिला ठोस जवाब

धरनारत किसानों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास से जुड़ी समस्याओं पर शासन-प्रशासन एवं एनटीपीसी द्वारा अब तक कोई स्पष्ट और ठोस जवाब नहीं दिया गया है,31 जनवरी 2026 को तहसीलदार एवं एनटीपीसी के अधिकारी चर्चा के लिए पहुंचे थे, लेकिन संतोषजनक समाधान दिए बिना लौट गए।

संवैधानिक नियमों के उल्लंघन का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि यह क्षेत्र संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है, जहां भूमि अधिग्रहण से पहले ग्रामसभा की सहमति जरूरी है,इसके बावजूद 27 नवंबर 2009 की अधिसूचना के तहत बिना अनुमति के भूमि अधिग्रहण किया गया।

किसानों की मांग है कि—

पुराने अधिग्रहण को निरस्त किया जाए

8 सितंबर 2015 को नई कटऑफ तिथि मानकर मुआवजा तय किया जाए,2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत उचित मुआवजा दिया जाए।

जल-जंगल-जमीन पर अधिकार की मांग

ग्रामीणों ने पेसा कानून के पालन की मांग करते हुए कहा कि आदिवासी बहुल क्षेत्र में उनके पारंपरिक अधिकारों की अनदेखी की जा रही है,कई गांवों में बिना मकान के मुआवजा दिए जाने की भी जांच की मांग की गई है।



वादों से मुकरने का आरोप

किसानों का आरोप है कि—

तेंदूपत्ता कार्डधारियों को प्रति कार्ड 5 लाख रुपये देने का वादा पूरा नहीं हुआ

हस्ताक्षर लेकर दस्तावेजों का दुरुपयोग किया गया

इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए


रोजगार और पुनर्वास प्रमुख मुद्दा

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें—

पुनर्वास नीति में संशोधन

काबिज किसानों को वनाधिकार पट्टे के समान मुआवजा

प्रभावित परिवारों को एनटीपीसी व ठेका कंपनियों में रोजगार

स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता




दिन में कार्रवाई नहीं तो उग्र आंदोलन

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर लिखित और संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई, तो वे कोयला खनन परियोजना और संबंधित कार्यों का व्यापक विरोध करेंगे,किसानों का कहना है कि वे 25 जनवरी 2026 से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं,यदि समाधान नहीं मिला, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।