नई दिल्ली। आज 1 फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में अपना नौवां केंद्रीय बजट पेश कर रही हैं, यह बजट देश की अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है,बजट से पहले पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में करीब 7 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि का संकेत दिया गया है।

आर्थिक सर्वे के अनुसार आगामी वित्त वर्ष में देश की विकास दर 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है, रिपोर्ट में बताया गया है कि घरेलू मांग मजबूत हुई है और वर्किंग-एज आबादी का देश को लाभ मिल रहा है, लेकिन स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में अभी भी बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।

इस बार के बजट में सरकार के रोजगार योजनाओं के विस्तार और पूंजीगत निवेश पर विशेष जोर देने की संभावना है, साथ ही इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती और उद्योगों को बढ़ावा देने पर भी अहम घोषणाएं हो सकती हैं।

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बजट में टैक्स स्लैब, महंगाई नियंत्रण, निवेश प्रोत्साहन और वैश्विक आर्थिक जोखिमों को लेकर सरकार के रुख पर बाजार की नजर टिकी हुई है,आम जनता, व्यापारी वर्ग और निवेशक सभी यह जानने को उत्सुक हैं कि क्या इस बार आयकर स्लैब में बदलाव होगा और मध्यम वर्ग को राहत मिलेगी।

वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार रोजगार सृजन, स्टार्टअप्स को समर्थन और बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दे सकती है, साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में खर्च बढ़ाकर मांग को और मजबूत करने की दिशा में भी कदम उठाए जा सकते हैं।

कुल मिलाकर, बजट 2026 से देश के हर वर्ग को बड़ी उम्मीदें हैं और यह देखना अहम होगा कि सरकार आर्थिक विकास और सामाजिक संतुलन के बीच किस तरह संतुलन बनाती है।











