HEM 2.0 बना निजी अस्पतालों की मुश्किल, आयुष्मान योजना से बाहर होने का बढ़ा खतरा

रायपुर। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत अस्पतालों की निगरानी और पंजीयन प्रक्रिया को सख्त करने के उद्देश्य से लागू किए गए नए डिजिटल सिस्टम HEM 2.0 ने निजी अस्पतालों विशेषकर छोटे और मध्यम स्तर के संस्थानों—की परेशानियां बढ़ा दी हैं, बदले हुए मानकों को लेकर अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सक संगठनों में खुला विरोध सामने आ रहा है।


न्यूनतम बेड क्षमता पर डॉक्टरों की नई शर्त
नई व्यवस्था के अनुसार 20 बिस्तरों वाले अस्पताल में अब कम से कम तीन MBBS डॉक्टरों की नियुक्ति अनिवार्य कर दी गई है, चौबीसों घंटे सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए तीनों डॉक्टरों को अलग-अलग शिफ्ट में तैनात रहना होगा, निजी अस्पतालों का कहना है कि सीमित आय में इतना अधिक वेतन भार उठाना संभव नहीं है, पहले वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति के डॉक्टरों के माध्यम से व्यवस्था संभाली जाती थी, लेकिन नए नियमों में यह विकल्प समाप्त कर दिया गया है।


विशेषज्ञ डॉक्टरों की संबद्धता पर रोक
HEM 2.0 के तहत सर्जन और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ अब अधिकतम तीन अस्पतालों से ही जुड़े रह सकेंगे, पहले विशेषज्ञ कई अस्पतालों में सेवाएं देते थे, जिससे छोटे अस्पतालों को राहत मिलती थी, नए प्रतिबंधों के चलते कई संस्थानों में सर्जरी सेवाएं प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।


पैनल से बाहर होने का खतरा
चिकित्सक संगठनों का मानना है कि नए मानकों को पूरा न कर पाने के कारण बड़ी संख्या में छोटे अस्पताल आयुष्मान योजना के पैनल से बाहर हो सकते हैं, इसका सीधा असर ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों के मरीजों पर पड़ेगा, जहां इलाज के विकल्प पहले से ही सीमित हैं।


31 जनवरी तक अपडेट अनिवार्य
स्वास्थ्य विभाग ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सभी निजी अस्पतालों को 31 जनवरी तक HEM 2.0 पोर्टल पर आवश्यक जानकारी अपडेट करना अनिवार्य होगा,इसी आधार पर आयुष्मान सहित अन्य सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में अस्पतालों की पात्रता तय की जाएगी,विभाग का दावा है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और इलाज की गुणवत्ता पर बेहतर नियंत्रण संभव होगा।


लंबित भुगतान से बढ़ी चिंता
आयुष्मान योजना के तहत निजी अस्पतालों के सैकड़ों करोड़ रुपये के भुगतान लंबित हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई है,इसका असर इलाज की प्रक्रिया पर भी दिखाई देने लगा है, डॉक्टर संगठनों का कहना है कि समय पर भुगतान न मिलने से अस्पतालों का संचालन मुश्किल होता जा रहा है।


डॉक्टर संगठनों का विरोध
आईएमए, एएचपीआई सहित कई चिकित्सक संगठनों ने नए नियमों को अव्यावहारिक बताते हुए, शासन से पुनर्विचार की मांग की है,संगठनों का आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था छोटे अस्पतालों को योजना से बाहर करने की दिशा में बढ़ रही है, जिसका सबसे ज्यादा नुकसान आम मरीजों को उठाना पड़ेगा।