बिलासपुर। जहां एक ओर पूरा देश 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और सम्मान के साथ मना रहा था, वहीं मस्तूरी जनपद के पाराघाट स्थित राशि स्टील प्लांट में राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान का मामला सामने आया है, आरोप है कि 26 जनवरी को ध्वजारोहण एवं राष्ट्रगान के दौरान तिरंगा फहराते ही जमीन पर गिर गया, लेकिन मौके पर मौजूद प्लांट प्रबंधन और कर्मचारी उसे तत्काल ससम्मान उठाने के बजाय मूकदर्शक बने रहे, इस पूरी घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसके बाद क्षेत्र में आक्रोश फैल गया।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित ध्वजारोहण कार्यक्रम में राशि स्टील प्लांट के डायरेक्टर रोहित अग्रवाल, ज्योति अग्रवाल, जीएम चिंटू मिश्रा सहित प्लांट के कर्मचारी और सुरक्षा बल के जवान उपस्थित थे, झंडावंदन और राष्ट्रगान के दौरान तिरंगा जमीन पर गिर गया, लेकिन किसी ने भी तुरंत उसे उठाने की पहल नहीं की। इसे राष्ट्रीय ध्वज का अपमान बताते हुए, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों ने कड़ा विरोध जताया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है,जब प्लांट प्रबंधन की ओर से इस तरह की लापरवाही सामने आई हो, इससे पूर्व 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भी राष्ट्रगान के बाद “भारत माता की जय” के नारे लगाने के बजाय “राशि स्टील की जय” जैसे नारे लगाए जाने का आरोप लग चुका है।


राशि स्टील प्लांट में तिरंगे के अपमान का आरोप, जमीन पर गिरे झंडे को न उठाने पर भड़का जनआक्रोश
इस घटना को लेकर कांग्रेस नेताओं एवं जनप्रतिनिधियों ने तहसीलदार मस्तूरी को ज्ञापन सौंपते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है,ज्ञापन सौंपने के दौरान कांग्रेस नेता एवं जनपद सदस्य मस्तूरी देवेंद्र कृष्णन, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष भोला राम साहू, एनएसयूआई के राष्ट्रीय पदाधिकारी राहुल राय, युवक कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष साहिल मधुकर, ऋतु भारद्वाज सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता मौजूद रहे।




जनप्रतिनिधियों ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज भारत की अस्मिता और सम्मान का प्रतीक है, और उसका अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है,उन्होंने प्रशासन से इस मामले में त्वरित और कठोर कार्रवाई करने की मांग की है।

राष्ट्रीय ध्वज के अपमान पर सजा का प्रावधान
भारतीय तिरंगे का अपमान करना—जैसे उसे जलाना, फाड़ना, जमीन पर गिराना या उसका अनादर करना—राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 2 के तहत एक गंभीर और दंडनीय अपराध है। इसके तहत दोषी को तीन वर्ष तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है, यह एक संज्ञेय अपराध है, जिसमें पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तारी कर सकती है।

इसके अलावा भारतीय ध्वज संहिता, 2002 में तिरंगे को फहराने और उसके उपयोग से संबंधित स्पष्ट नियम दिए गए हैं, जिनका उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है,
तिरंगे का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक कर्तव्य है।











