लोकगीत अमृत की बूंदें हैं :– डॉ. पीसी लाल यादवरायपुर साहित्य उत्सव में दो पुस्तकों का हुआ विमोचन

रायपुर।  राजधानी रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में 23 से 25 जनवरी तक तीन दिवसीय “रायपुर साहित्य उत्सव” का भव्य और गरिमामय आयोजन किया गया,इस आयोजन में देशभर से सैकड़ों कवि, लेखक, साहित्यकार, विचारक, कलाकार, पत्रकार एवं प्रबुद्धजन शामिल हुए, यह उत्सव साहित्य के महाकुंभ के रूप में नजर आया।



साहित्य उत्सव के मुख्य अतिथि राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की विशिष्ट अतिथि के रूप में उपमुख्यमंत्री अरुण साव तथा महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. कुमुद शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही, आयोजन स्थल पर छत्तीसगढ़ के पुरखा साहित्यकारों की स्मृति में अनेक मंडप स्थापित किए गए थे।



उत्सव के दूसरे दिन लाला जगदलपुरी मंडप में गंडई के वरिष्ठ साहित्यकार एवं संस्कृति कर्मी डॉ. पीसी लाल यादव ने “छत्तीसगढ़ के लोकगीत” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया, उन्होंने कहा कि लोकगीत लोकजीवन में सर्वत्र व्याप्त हैं और लोक के लिए अमृत की बूंदों के समान हैं, जिनसे लोक ऊर्जा प्राप्त करता है। लोकगीत हमारी संस्कृति के अभिन्न अंग हैं, जो जन्म से लेकर मृत्यु तक लोकजीवन के साथ जुड़े रहते हैं।



इस अवसर पर डॉ. विनय पाठक, डॉ. बिहारी लाल साहू एवं शकुंतला तरार ने भी अपने विचार व्यक्त किए, कार्यक्रम का कुशल संचालन आशीष सिंघानिया ने किया।



इसी मंडप में देश के सुप्रसिद्ध गीतकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र के करकमलों से डॉ. पीसी लाल यादव की दो पुस्तकों—छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल संग्रह “हमर का बने का गिनहा” तथा छत्तीसगढ़ी गीत/कविता संग्रह “दिन म घलो अंधियार हवय”—का विधिवत विमोचन किया गया।



विमोचन पश्चात आयोजन समिति द्वारा डॉ. पीसी लाल यादव को राजकीय गमछा एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया, इस उपलब्धि पर डॉ. सियाराम साहू, कमलेश प्रसाद शर्मा बाबू, राजकुमार मसखरे, लच्छू यादव, धर्मेंद्र जंघेल, धर्मेंद्र डहरवाल, रामकुमार साहू सहित अनेक साहित्यकारों और कलाकारों ने शुभकामनाएं एवं बधाइयां दीं।

रिपोर्टर : राशिद जमाल सिद्दीकी