शब्दातीर ( डेस्क )। भारत में बसंत पंचमी केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि ऋतुओं के बदलाव, ज्ञान की उपासना और सांस्कृतिक उत्सव का सुंदर संगम है,यह दिन प्रकृति में नई कोपलों, खेतों में सरसों की पीली आभा और मन में रचनात्मक ऊर्जा के संचार का प्रतीक माना जाता है, मान्यता है कि इसी शुभ तिथि पर विद्या, बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती प्रकट हुई थीं, इसलिए इस दिन शिक्षा और ज्ञान से जुड़े विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं।
23 जनवरी को मनाई जाएगी बसंत पंचमी
हिंदू पंचांग के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी मनाई जाती है, इस वर्ष यह पर्व 23 जनवरी, शुक्रवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा,बसंत पंचमी को ज्ञान, संगीत, कला, सृजन और ऋतु परिवर्तन का प्रतीक माना जाता है।
पूर्वी भारत में विद्या की भव्य आराधना
पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में बसंत पंचमी अत्यंत भव्य रूप में मनाई जाती है, घरों, विद्यालयों और सार्वजनिक पंडालों में मां सरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित कर विधिवत पूजा-अर्चना होती है,बंगाल में इस दिन “हाते खोड़ी” की परंपरा निभाई जाती है, जिसमें छोटे बच्चों को पहली बार अक्षर लिखना सिखाया जाता है, इसे विद्या आरंभ का अत्यंत शुभ अवसर माना जाता है।

उत्तर भारत में फसल और पतंगों का उत्सव
पंजाब और हरियाणा में बसंत पंचमी का सीधा संबंध सरसों की फसल और पीले खेतों से जुड़ा है, लोग पीले वस्त्र धारण करते हैं, पारंपरिक व्यंजन बनाते हैं और पतंग उड़ाकर उत्सव मनाते हैं। यह दिन किसानों के लिए भी विशेष महत्व रखता है।
तीर्थों पर स्नान और विशेष आरती
उत्तर प्रदेश के वाराणसी और प्रयागराज में बसंत पंचमी पर गंगा घाटों पर विशेष आरती और स्नान का आयोजन होता है, प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में इस दिन स्नान को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है, जिससे जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि आती है।
पश्चिम भारत में रंगीन आसमान
राजस्थान और गुजरात में बसंत पंचमी पतंगबाजी के लिए प्रसिद्ध है, लोग पीले परिधान पहनते हैं, घरों को फूलों से सजाते हैं और नए मौसम का स्वागत करते हैं, यहां यह पर्व उल्लास और उमंग का प्रतीक बन जाता है।
दक्षिण भारत में विद्यारंभ की परंपरा
तेलंगाना के बासर स्थित विश्व प्रसिद्ध मां सरस्वती मंदिर में बसंत पंचमी पर अक्षर अभ्यासम का आयोजन होता है,इस अवसर पर बच्चों को पहली बार पढ़ने-लिखने की शुरुआत कराई जाती है और शिक्षा से जुड़ी वस्तुओं का दान किया जाता है।
ज्ञान और सृजन का संदेश
देशभर में बसंत पंचमी के दिन विद्यालयों, महाविद्यालयों और घरों में मां सरस्वती की पूजा कर विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की जाती है, यह पर्व हमें स्मरण कराता है कि ज्ञान, कला और संस्कृति ही समाज की वास्तविक शक्ति हैं।










