रायगढ़।संबलपुरी क्षेत्र स्थित शिव शक्ति फैक्ट्री से निकलने वाला काला धुआं और जहरीली डस्ट अब केवल वायु प्रदूषण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आसपास के घने जंगलों को भी धीरे-धीरे मौत की ओर धकेल रहा है, सामने आई तस्वीरें और प्रत्यक्ष प्रमाण इस भयावह सच्चाई को उजागर कर रहे हैं, जिनमें जंगल के पेड़-पौधों की पत्तियों पर काले रंग की मोटी परत जमी साफ दिखाई दे रही है, यह परत सामान्य धूल नहीं, बल्कि फैक्ट्री से निकलने वाले जहरीले प्रदूषक तत्वों का ठोस प्रमाण है।

काली डस्ट से बाधित हो रही प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो पेड़-पौधे सूर्य के प्रकाश, कार्बन डाइऑक्साइड और क्लोरोफिल की सहायता से प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा भोजन बनाते हैं, और ऑक्सीजन उत्सर्जित करते हैं, लेकिन जब पत्तियों पर काली डस्ट, कार्बन कण, सल्फर डाइऑक्साइड और अन्य विषैले तत्व जम जाते हैं, तो पत्तियों के स्टोमाटा (सूक्ष्म छिद्र) बंद हो जाते हैं, इससे कार्बन डाइऑक्साइड का आदान-प्रदान रुक जाता है, और सूर्य का प्रकाश पत्तियों तक नहीं पहुंच पाता, परिणामस्वरूप प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया धीमी होकर लगभग ठप हो जाती है और पौधे कमजोर होकर सूखने लगते हैं।

जंगलों पर सीधा हमला, जैव विविधता खतरे में
विडंबना यह है कि जिन पेड़ों को पर्यावरण शुद्ध करने की जिम्मेदारी मिली है, वही पेड़ आज प्रदूषण के बोझ तले दम तोड़ने को मजबूर हैं, शिव शक्ति फैक्ट्री से फैल रहे प्रदूषण के कारण जंगल की हरियाली पर सीधा हमला हो रहा है,पत्तियां मुरझा रही हैं, नई कोपलें नहीं फूट रहीं, और कई पौधों में रोग के स्पष्ट लक्षण दिखाई दे रहे हैं, इसका सीधा असर जंगल की जैव विविधता पर पड़ रहा है, कीट-पतंगे, पक्षी और वन्य जीव भी इस जहरीले वातावरण से प्रभावित हो रहे हैं, जिससे पूरा इकोसिस्टम असंतुलन की ओर बढ़ रहा है।

मानव जीवन पर भी गंभीर असर
पर्यावरण मित्र बजरंग अग्रवाल ने बताया कि इस प्रदूषण का प्रभाव केवल जंगलों तक सीमित नहीं है, फैक्ट्री के आसपास के गांवों और बस्तियों में रहने वाले लोग सांस की बीमारियों, आंखों में जलन, त्वचा रोग, एलर्जी और दमा जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। लंबे समय तक इस जहरीले प्रदूषण के संपर्क में रहने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।

जहर उगलती फैक्ट्री पर पर्यावरण प्रेमियों का आरोप
पर्यावरण प्रेमी और सामाजिक कार्यकर्ता बजरंग अग्रवाल ने शिव शक्ति फैक्ट्री पर गंभीर आरोप लगाते हुए, कहा कि यह फैक्ट्री लगातार “काला जहर” उगल रही है,प्रदूषण नियंत्रण के दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं,जंगलों की पत्तियों पर जमी काली परत इस बात का खुला सबूत है कि नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं,यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो संबलपुरी और आसपास का इलाका गंभीर पर्यावरणीय आपदा का शिकार हो सकता है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
स्थानीय लोगों और पर्यावरण मित्रों का कहना है कि फैक्ट्री की चिमनियों और परिसर से बड़े पैमाने पर काला धुआं और धूल-गुबार फैल रहा है,प्रदूषण नियंत्रण उपकरण जैसे ईएसपी और फिल्टर या तो ठीक से काम नहीं कर रहे हैं,या जानबूझकर बंद रखे जाते हैं, इसके बावजूद संबंधित विभागों की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है।

काली परत एक चेतावनी
बजरंग अग्रवाल का कहना है कि जंगल के पेड़ों की पत्तियों पर जमी काली परत केवल धूल नहीं, बल्कि एक चेतावनी है,यदि शिव शक्ति फैक्ट्री से निकलने वाले प्रदूषण पर तत्काल रोक नहीं लगी तो जंगल, पर्यावरण और मानव जीवन तीनों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा, अब समय आ गया है कि कड़ा निरीक्षण, वैज्ञानिक जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि जंगलों की हरियाली और लोगों की सांसें बचाई जा सकें।










