ज़हर उगलते उद्योग, मौन प्रशासन जिंदल स्टील एंड पावर पतरापाली में खुलेआम उड़ रहा काला धुआं, रायगढ़ की जनता गंभीर खतरे में…….!!

रायगढ़।औद्योगिक विकास के नाम पर रायगढ़ जिले की आबोहवा में लगातार ज़हर घोला जा रहा है, जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड, पतरापाली (रायगढ़) की चिमनियों से दिन के उजाले में निकलता घना काला धुआं इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि पर्यावरण सुरक्षा को लेकर बड़े उद्योगों के दावे केवल कागज़ों तक सीमित रह गए हैं,कंपनियां भले ही ईएसपी (ESP) मशीनें चालू रहने और प्रदूषण नियंत्रित होने की बात करती हों, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।



ग्रामीणों से मिली जानकारी और सामने आई तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि फैक्ट्री की चिमनियों से निकलता काला धुआं आसपास के वातावरण में फैलकर हवा को जहरीला बना रहा है, इसका असर न केवल वायु गुणवत्ता पर पड़ रहा है, बल्कि आसपास के गांवों, खेतों, जल स्रोतों और जंगलों को भी गंभीर नुकसान पहुंच रहा है,ऐसे में सवाल उठना लाज़िमी है कि जब इतनी बड़ी औद्योगिक इकाइयां खुलेआम प्रदूषण फैला रही हैं, तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन की भूमिका आखिर क्या है? क्या वे केवल मूकदर्शक बनकर रह गए हैं…?



विशेषज्ञों के अनुसार काले धुएं में मौजूद सूक्ष्म कण (PM2.5, PM10), सल्फर डाइऑक्साइड और अन्य जहरीली गैसें सांस के ज़रिये सीधे मानव शरीर में प्रवेश करती हैं,इनके लगातार संपर्क में रहने से दमा, टीबी, फेफड़ों के संक्रमण, हृदय रोग, आंखों में जलन, त्वचा रोग और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर इसका प्रभाव सबसे अधिक और घातक साबित हो सकता है।



पर्यावरणीय दृष्टि से भी स्थिति बेहद चिंताजनक है,औद्योगिक प्रदूषण के कारण जल स्रोत दूषित हो रहे हैं, फसलों की उत्पादकता घट रही है और जंगलों की जैव विविधता को भारी नुकसान पहुंच रहा है, स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि धुएं और धूल के कारण सांस लेना तक मुश्किल हो गया है, लेकिन बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही।



सामाजिक कार्यकर्ता राजेश त्रिपाठी का कहना है कि रायगढ़ के लगभग सभी उद्योग और कोयला खदानें ज़हर उगल रही हैं, जिससे जिले की जनता की जिंदगी टीबी, दमा और कैंसर जैसी घातक बीमारियों के गंभीर खतरे में है, उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अब भी रायगढ़ की जनता बढ़ते प्रदूषण के खिलाफ आवाज़ नहीं उठाएगी, तो आने वाले समय में रायगढ़ को बचाना मुश्किल हो जाएगा।



अब बड़ा सवाल यह है कि क्या शासन-प्रशासन औद्योगिक घरानों के दबाव में आंख मूंदे बैठा है, या फिर जनता के स्वास्थ्य और पर्यावरण की कीमत पर विकास की यह कहानी यूं ही चलती रहेगी…? जरूरत है कि जिम्मेदार विभाग तत्काल स्थल निरीक्षण कर सख्त कार्रवाई करें, ताकि रायगढ़ की आबोहवा, जल-जंगल-ज़मीन और लोगों की ज़िंदगी को बचाया जा सके।