प्रयागराज। अभी चल रहे महाकुंभ में हिंदू धर्म के प्रमुख जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी के साथ हुई अभद्रता और धक्का-मुक्की की घटना ने श्रद्धालुओं और संत समाज को गहरे आघात पहुंचाया है,आरोप है कि माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर उन्हें गंगा स्नान से रोका गया, जो न केवल धार्मिक मर्यादाओं के विपरीत है बल्कि अत्यंत दुखद और निंदनीय भी है।
घटना के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी ने गंगा तट पर भूखे-प्यासे अनशन शुरू कर दिया है, ठंड के बीच उनका इस प्रकार अनशन पर बैठना श्रद्धालुओं के लिए चिंता का विषय बना हुआ है, संत समाज का कहना है कि जगद्गुरु जैसे महान धर्माचार्य के साथ इस तरह का व्यवहार पूरे हिंदू समाज का अपमान है।

कुंभ में मौजूद संतों, अखाड़ों और श्रद्धालुओं में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं, प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है।
धार्मिक संगठनों का कहना है कि कुंभ जैसे विश्व प्रसिद्ध धार्मिक आयोजन में संतों और धर्मगुरुओं के सम्मान व सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन की होती है। ऐसे में जगद्गुरु को स्नान से रोकना और उन्हें अनशन के लिए मजबूर होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।









