रायगढ़। रायगढ़ से एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है, जहां सरकारी योजनाओं और शिक्षा के तमाम दावों पर औद्योगिक प्रदूषण भारी पड़ता नजर आ रहा है, जिला मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर वार्ड क्रमांक 41 स्थित सहदेवपाली प्राथमिक शाला आज पढ़ाई का नहीं, बल्कि प्रदूषण के कहर का प्रतीक बन चुकी है, यहां पढ़ने वाले नौनिहाल बच्चे किताबों से ज्यादा राख और धूल से जूझने को मजबूर हैं।

शिक्षा पर भारी प्रदूषण का खतरा, राइस मिलों की राख-धूल में कैद मासूमों का भविष्य
सहदेवपाली प्राथमिक शाला के आसपास कई राइस मिलें संचालित हैं, जिनमें रायगढ़ सॉल्वेंट, सिद्धि विनायक राइस मिल और सावित्री राइस मिल प्रमुख हैं,इन मिलों से उड़ने वाली राख और महीन धूल हवा के साथ सीधे स्कूल परिसर और कक्षाओं में भर जाती है।

शिक्षा बनाम उद्योग: सहदेवपाली प्राथमिक शाला में दम घोंटता प्रदूषण
स्कूल के फर्श, बेंच और किताबों पर राख की मोटी परत साफ दिखाई देती है, हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि बच्चों के लिए खुले मैदान में खेलना तो दूर, ठीक से सांस लेना तक मुश्किल हो गया है।

रायगढ़ में शिक्षा पर प्रदूषण का हमला, मासूमों का भविष्य दांव पर
प्रदूषण का सीधा असर अब बच्चों के स्वास्थ्य पर भी नजर आने लगा है। स्कूल में पढ़ने वाले कई बच्चों को त्वचा रोग, आंखों में जलन और सांस संबंधी परेशानियों की शिकायत हो रही है। शिक्षकों के मुताबिक, मजबूरी में बच्चों की बाहरी गतिविधियां पूरी तरह बंद करनी पड़ी हैं, जिससे उनकी शारीरिक और मानसिक विकास पर भी असर पड़ रहा है।

राइस मिलों की राख में दबा बचपन, सहदेवपाली स्कूल बना ज़हरखाना
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मध्याह्न भोजन तक बच्चों को दरवाजे-खिड़कियां बंद कर और पर्दों की आड़ में करना पड़ता है, ताकि उड़ती राख से कुछ हद तक बचाव हो सके, बावजूद इसके, धूल पूरी तरह से रुक नहीं पा रही।

नोनीहालों की सांसों पर भारी राइस मिलें, स्कूल बना प्रदूषण का शिकार
शाला समिति अध्यक्ष आत्माराम देवांगन और सहायक शिक्षिका गीता मेहेर का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है स्थानीय लोगों के अनुसार, आसपास संचालित राइस मिलों से उड़ने वाली राख को लेकर वर्षों से शिकायतें की जा रही हैं, और कई बार विरोध भी हुआ,हालात इतने बिगड़ चुके थे,कि एक समय स्कूल को गांव के एक घर में शिफ्ट करना पड़ा था, लेकिन आज तक इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।

जहाँ मिड-डे मील भी पर्दों में, वहाँ कैसे पढ़ेगा बच्चा?
मामले को लेकर जिला प्रशासन की ओर से एडीएम अपूर्व प्रियेश टोप्पो ने जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है, उन्होंने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर प्रशासन संवेदनशील है,और जांच के बाद उचित कदम उठाए जाएंगे।

उद्योगों की लापरवाही की कीमत चुका रहे बच्चे, स्कूल बना राख का ढेर
अब बड़ा सवाल यही है कि प्रशासन कब ठोस कार्रवाई करेगा? क्या इन मासूम बच्चों की सेहत और भविष्य यूं ही औद्योगिक प्रदूषण की भेंट चढ़ता रहेगा? अगर जल्द ही सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो इसके नतीजे बेहद गंभीर हो सकते हैं।










