रायगढ़। छत्तीसगढ़ का औद्योगिक हब रायगढ़ अब विकास नहीं, बल्कि जहरीली सांसों का कब्रिस्तान बनता जा रहा है, उद्योगों की चिमनियों से उगलता ज़हर, उड़ती फ्लाई ऐश और रासायनिक कणों ने शहर की आबोहवा को इस कदर बिगाड़ दिया है कि अब यह सिर्फ पर्यावरणीय समस्या नहीं, बल्कि सीधा जनसंहार बन चुकी है,प्रशासन की चुप्पी और सिस्टम की बेरुखी के खिलाफ सोमवार को युवा कांग्रेस ने ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया।

शहर के ऐतिहासिक महात्मा गांधी चौक पर युवा कांग्रेस ने स्याही नहीं, अपने खून से पत्र लिखकर देश के राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से न्याय की गुहार लगाई, यह प्रदर्शन नहीं, बल्कि सिस्टम को दी गई खुली चेतावनी थी।
दोपहर 12 बजे से ही गांधी चौक पर आक्रोश उमड़ पड़ा, युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष आशीष जायसवाल के नेतृत्व में सैकड़ों युवा और आम नागरिक सड़कों पर उतरे। “रायगढ़ अब रहने लायक नहीं रहा”, “हमें सांस लेने दो” जैसे नारों से पूरा चौक गूंज उठा, प्रदर्शनकारियों का दर्द साफ था,महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग, कोई भी प्रदूषण की मार से बचा नहीं है।

नारेबाजी के बीच युवाओं ने अपना खून निकालकर सादे कागज पर लिखा—
“रायगढ़ को प्रदूषण से बचाओ”
यह दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाला था, जिसने यह साफ कर दिया कि अब सब्र का बांध टूट चुका है,इस उग्र आंदोलन की तैयारी कई दिनों से चल रही थी, युवा कांग्रेस ने करीब 5 हजार पंपलेट छपवाकर शहर के हर गली-मोहल्ले तक यह संदेश पहुंचाया कि कैसे औद्योगिक इकाइयां नियमों को रौंद रही हैं, और प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। युवाओं ने ऐलान किया कि खून से लिखा यह पत्र सिर्फ राष्ट्रपति और चीफ जस्टिस को नहीं, बल्कि एनजीटी (NGT), मुख्यमंत्री और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री को भी भेजा जाएगा।

मीडिया से बात करते हुए आशीष जायसवाल ने दो टूक कहा—
“यह कोई ड्रामा नहीं, बल्कि मरते हुए शहर की आखिरी चीख है,हम कई बार ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी,अब मजबूरी में देश की सर्वोच्च संस्थाओं का दरवाजा खटखटा रहे हैं,”युवाओं का गुस्सा यूं ही नहीं फूटा है। इसके पीछे डराने वाले वैज्ञानिक आंकड़े हैं, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मुताबिक रायगढ़ का AQI खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है।

मिलुपारा और छाल जैसे औद्योगिक इलाकों में PM-10 का स्तर 200 माइक्रोग्राम के करीब है, जबकि सुरक्षित सीमा 100 से कम होनी चाहिए,कुंजेमुरा में भी यह स्तर 179 माइक्रोग्राम दर्ज किया गया है,सर्दियों में रायगढ़ के आसमान पर छाई धुंध कोई प्राकृतिक कोहरा नहीं, बल्कि जहर की चादर है। ‘मिडिया ’ की रिपोर्ट बताती है कि नमी के कारण चिमनियों से निकलने वाली डस्ट और गैसें ऊपर उठने के बजाय जमीन पर ही फैल रही हैं, शाम होते ही पूरा शहर ‘ओपन गैस चैंबर’ में तब्दील हो जाता है,
मिलुपारा, छाल और पूंजीपथरा में NO₂ और SO₂ जैसी जहरीली गैसें खतरे की सीमा छू रही हैं, सड़कों पर उड़ती फ्लाई ऐश और कोयले से लदे भारी वाहनों ने हालात को दिल्ली और कानपुर से भी बदतर बना दिया है।

अब सवाल यह है—
क्या खून से लिखा यह पत्र सोए हुए सिस्टम को जगा पाएगा…?
या फिर रायगढ़ के लोग यूं ही तथाकथित विकास की कीमत अपनी सांसों से चुकाते रहेंगे…?










