उफनते नाले, घना जंगल… लेकिन टूटा बाल विवाह का षड्यंत्र…!!12 साल की बच्ची की शादी ऐन वक्त पर रोकी, सुकमा प्रशासन की दबंग कार्रवाई….

सुकमा। सुकमा जिले के दुर्गम अंचल में बाल विवाह कराने की कोशिश पर जिला प्रशासन ने ऐसा प्रहार किया कि पूरा गांव सन्न रह गया,मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के “बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़” अभियान के तहत कलेक्टर अमित कुमार के नेतृत्व में प्रशासन ने उफनते नदी-नाले और घने जंगलों को पार कर एक 12 वर्षीय नाबालिग बालिका की शादी को ऐन वक्त पर रोक दिया।

“बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़” का मैदान में दमदार एक्शन


ग्राम पंचायत रामाराम के सुदूर गांव नाड़ीगुफा से जैसे ही बाल विवाह की सूचना मिली, जिला प्रशासन हरकत में आ गया, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी शिवदास नेताम के नेतृत्व में जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड लाइन और सेक्टर सुपरवाइजर की संयुक्त रेस्क्यू टीम तुरंत रवाना की गई।


जहाँ रास्ते भी कांपें, वहाँ पहुंचा प्रशासन


नाड़ीगुफा तक पहुंचने का रास्ता बेहद खतरनाक था,उफनते नाले, फिसलन भरी पगडंडियां और घना जंगल, लेकिन बालिका का भविष्य बचाने के संकल्प के आगे ये सारी बाधाएं बौनी साबित हुईं, घंटों की पैदल मशक्कत के बाद टीम गांव पहुंची, तब तक विवाह की रस्में शुरू होने ही वाली थीं।


कानून का डंडा और इंसानियत की बात—दोनों का असर


मौके पर अधिकारियों ने हालात को सख्ती और संवेदनशीलता दोनों के साथ संभाला, परिजनों और ग्रामीणों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत सख्त कानूनी परिणामों से अवगत कराया गया, साथ ही समझाया गया कि बाल विवाह एक अपराध ही नहीं, बल्कि बच्ची के स्वास्थ्य, शिक्षा और पूरे जीवन को तबाह कर देता है, प्रशासन की दो-टूक समझाइश के बाद परिजन झुके और शादी तत्काल रोक दी गई, मौके पर पंचनामा तैयार कर बालिका को सुरक्षित संरक्षण में लिया गया।


शादी नहीं, स्कूल जाएगी बच्ची
प्रशासन ने साफ कर दिया कि बच्ची का भविष्य अब किताबों और स्कूल से जुड़ेगा, न कि बाल विवाह से परिजनों को शिक्षा से जोड़ने और शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश दिए गए, प्रशासन का लक्ष्य जिले की हर पंचायत को बाल विवाह मुक्त बनाना है।


कलेक्टर का कड़ा अल्टीमेटम
कलेक्टर अमित कुमार ने स्पष्ट कहा कि सुकमा जिले में बाल विवाह किसी भी हाल में सहन नहीं किया जाएगा, दुर्गम और अंदरूनी इलाकों में भी प्रशासन की पैनी नजर बनी हुई है, और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


रेस्क्यू टीम बनी बच्ची की ढाल
इस साहसिक कार्रवाई में संरक्षण अधिकारी (गैर संस्थागत देखरेख) मनीषा शर्मा, सेक्टर सुपरवाइजर निशा साहू, सामाजिक कार्यकर्ता जोगेंद्र दिर्दो, काउंसलर लोकेश्वरी, चाइल्ड लाइन सुपरवाइजर मल्लिका सोड़ी, केस वर्कर मुड़ा पोडियामी तथा संबंधित आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की निर्णायक भूमिका रही,
यह कार्रवाई सिर्फ एक शादी रुकने की खबर नहीं है, बल्कि यह संदेश है कि बाल विवाह कराने वालों के लिए सुकमा में कोई जगह नहीं है, प्रशासन की यह दबंग कार्रवाई पूरे प्रदेश के लिए चेतावनी और मिसाल दोनों बन गई है।