जगदलपुर। कांकेर जिले के आमाबेड़ा में धर्मांतरण और शव दफन को लेकर हिंसा को लेकर आज सर्व समाज सर्व समाज बस्तर ,जनजातीय सुरक्षा मंच और विश्व हिंदू परिषद के द्वारा संयुक्त रूप से प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया था, प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री और आदिवासी नेता अरविंद नेताम ने कांकेर में हिंसा के लिए ईसाई मिशनरियों को जिम्मेदार बताया है।
पूर्व मंत्री अरविंद नेताम ने ईसाई मिशनरियों पर लगाए गंभीर आरोप
उन्होंने कहा कि 15 दिसंबर 2025 को कांकेर के बड़ेतेवड़ा गांव निवासी चमरा राम सलाम की मृत्यु से जुड़ी है,मृतक का पुत्र राजमन सलाम, जो वर्तमान में गांव का सरपंच है, उसी रात लगभग 10 बजे शव को गांव लेकर पहुंचा, 16 दिसंबर की सुबह ग्राम समाज के परंपरागत पदाधिकारी एवं वरिष्ठ ग्रामीण शव के अंतिम संस्कार के विषय में चर्चा हेतु एकत्रित हुए, इस दौरान ग्राम सभा की अनुमति के बिना बाहरी व्यक्तियों, भीम आर्मी से जुड़े पदाधिकारी एवं पास्टर-पादरी की उपस्थिति पाई गई।
ग्रामीणों द्वारा स्पष्ट रूप से यह कहा गया कि गांव का श्मशान स्थल जनजातीय आस्था, पेन-पुरखा परंपरा एवं सामाजिक नियमों के अनुसार संचालित होता है, और अंतिम संस्कार उसी विधि से किया जाना चाहिए, इसके बावजूद सरपंच राजमन सलाम एवं उसके परिजनों द्वारा धमकीपूर्ण भाषा का प्रयोग करते हुए निजी भूमि में ईसाई रीति-रिवाज से शव दफन करने की घोषणा की गई, जिससे गांव में भय और तनाव का वातावरण उत्पन्न हुआ।
घटना के पश्चात तहसीलदार एवं अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे, परंतु ग्रामीणों द्वारा दिए गए आवेदन को लेने से उनके द्वारा इनकार किया गया। प्रशासनिक उदासीनता के चलते सर्व समाज द्वारा शांतिपूर्ण धरना प्रारंभ किया गया,इसके बावजूद न तो समय पर बातचीत की गई,और न ही स्थिति को नियंत्रित करने हेतु प्रभावी कदम उठाए गए।
17 दिसंबर 2025 की सुबह प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन के विपरीत, कब्र स्थल पर पक्का चबूतरा निर्मित पाया गया। इसी दौरान बड़ी संख्या में बाहरी लोगों द्वारा संगठित रूप से निहत्थे ग्रामीणों पर हमला किया गया, जिसमें लगभग 25 ग्रामीण घायल हुए, जिनमें 11 को गंभीर चोटें आईं इस दौरान पुलिस द्वारा हमलावरों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई।
रिपोर्टर राशिद जमाल सिद्दीकी










