रायगढ़। वनभूमि पर अतिक्रमण के एक गंभीर प्रकरण को लेकर रायगढ़ में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है,आरोप है कि वन विभाग ने POR क्रमांक 4946/05 को जानबूझकर छिपाया, जो सीधे तौर पर NR इस्पात परियोजना से जुड़ा हुआ है, यह वही प्रकरण बताया जा रहा है, जिसे विधानसभा में उठे सवालों के दौरान सदन के पटल पर रखा जाना चाहिए था, लेकिन कथित तौर पर उद्योग को बचाने के लिए इसका उल्लेख तक नहीं किया गया।

विधानसभा में रायगढ़ विधायक पुरंदर मिश्र ने NR इस्पात को लेकर जमीन आबंटन और वनभूमि अतिक्रमण से जुड़े सवाल लगाए थे,इस दौरान यह अपेक्षा थी कि वन विभाग संबंधित सभी वैधानिक दस्तावेज और लंबित प्रकरण प्रस्तुत करेगा, हालांकि, विभाग के जवाबों में POR 4946/05 का कोई जिक्र नहीं मिला, जिससे अब विभागीय जवाबों को अधूरी और भ्रामक जानकारी करार दिया जा रहा है,सूत्रों के अनुसार, POR 4946/05 वनभूमि पर अतिक्रमण से संबंधित एक अहम मामला है। यदि यह प्रकरण विधानसभा में प्रस्तुत किया जाता, तो न केवल वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते, बल्कि NR इस्पात की वैधानिक स्थिति भी कठघरे में आ जाती,
मामले को और गंभीर बनाते हुए यह आशंका भी जताई जा रही, है कि NR इस्पात के इस बड़े प्रोजेक्ट में कथित छत्तीसगढ़ कोयला घोटाले का पैसा लगाया गया है,इसी वजह से प्रशासनिक और विभागीय स्तर पर उद्योग को असाधारण संरक्षण मिलने के आरोप लगाए जा रहे हैं, उल्लेखनीय है कि NR इस्पात पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ का दूसरा सबसे बड़ा निवेश (MOU) करने वाली कंपनी रही है,राजनीतिक गलियारों में अब तीन सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में हैं—
• क्या POR 4946/05 को जानबूझकर छिपाया गया?
• क्या वन विभाग ने विधानसभा को गुमराह किया?
• और क्या राजनीतिक रसूख के चलते NR इस्पात को कानून से ऊपर रखा गया?
मामला सामने आने के बाद विधानसभा रिकॉर्ड, संदर्भ समिति को भेजे गए पत्रों और वन विभागीय फाइलों की गहन जांच की मांग तेज हो गई है, जानकारों का कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सिर्फ वन अधिनियम का उल्लंघन नहीं, बल्कि एक संवैधानिक संस्था—विधानसभा—को गुमराह करने का गंभीर मामला होगा।
फिलहाल, जांच के बिना अंतिम निष्कर्ष संभव नहीं है, लेकिन इस प्रकरण ने रायगढ़ से लेकर राजधानी तक राजनीतिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। POR 4946/05 अब केवल एक फाइल नंबर नहीं, बल्कि सत्ता, पैसा और सिस्टम की कथित सांठगांठ का प्रतीक बनता जा रहा है।










