रायगढ़ वन मंडल में करोड़ों के कथित घोटाले से मचा हड़कंप, विधानसभा से लेकर वन विभाग तक सवालों की बौछार…..!!

रायगढ़।छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के रायगढ़ वन मंडल में करोड़ों रुपये के कथित घोटाले ने प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी है। यह मामला अब केवल विभागीय जांच तक सीमित न रहकर राजनीतिक और सामाजिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है,घोटाले की परतें उस वक्त खुलनी शुरू हुईं, जब पूर्व नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने इसे विधानसभा के पटल पर उठाया।

सदन में सवाल उठते ही वर्षों से दबे तथ्यों पर से पर्दा उठने लगा और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए, इसके बाद मुनादी डॉट कॉम ने अपनी वेब न्यूज रिपोर्ट के माध्यम से तथ्यों और आंकड़ों के साथ इस पूरे मामले को उजागर किया, जिससे वन विभाग में हड़कंप की स्थिति बन गई।

वन विभाग पर आरोप है कि विभिन्न योजनाओं, कार्यों के क्रियान्वयन और भुगतान प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गई हैं, विधानसभा में मुद्दा उठने के बाद विभागीय जांच की बात जरूर कही गई, लेकिन जांच प्रक्रिया ही संदेहों के घेरे में आ गई है।

मिडिया की रिपोर्ट सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया, रिपोर्ट में उजागर तथ्यों से यह संकेत मिला है कि यह कोई एकल प्रकरण नहीं, बल्कि एक सुनियोजित तंत्र का हिस्सा हो सकता है, इसके बाद विभाग के भीतर मैनेजमेंट और डैमेज कंट्रोल की कोशिशें तेज हो गईं, आरोप है कि जांच के नाम पर मामले को सीमित दायरे में समेटने और जिम्मेदारी दूसरों पर डालने की रणनीति अपनाई जा रही है।



सूत्रों के अनुसार, अब सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि घोटाला हुआ या नहीं, बल्कि यह है कि इसकी सच्चाई कितनी गहराई तक सामने आएगी,“सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे” की तर्ज पर मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिशों के आरोप भी लग रहे हैं, जिससे वन विभाग की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है।

इस पूरे प्रकरण ने यह भी उजागर किया है कि यदि एक मामले में करोड़ों रुपये के घोटाले की आशंका है, तो विभाग के भीतर और कितनी अनियमितताएं दबी हो सकती हैं,जानकारों का मानना है कि बिना स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के सच्चाई सामने आना मुश्किल है।

फिलहाल यह मामला वन विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है,अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं,यह देखना अहम होगा कि क्या केवल औपचारिक कार्रवाई तक ही मामला सीमित रहेगा या वास्तव में जांच की आंच जिम्मेदारों तक पहुंचेगी,सच क्या है और दोषी कौन—इसका फैसला आने वाली जांच ही करेगी, लेकिन इतना तय है कि इस कथित घोटाले ने व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।