रायगढ। जिले के तमनार क्षेत्र में प्रस्तावित कोयला खदान परियोजना को लेकर 8 दिसंबर 2025, सोमवार को निर्धारित जनसुनवाई के विरोध में क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, धौराभांटा में स्थानीय ग्रामीण अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं, हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बावजूद बुजुर्ग, महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में दिन-रात विरोध स्थल पर डटे हुए हैं।

ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि यह आंदोलन किसी एक परियोजना के खिलाफ नहीं, बल्कि जल-जंगल-ज़मीन और अपने अस्तित्व की रक्षा का संघर्ष है,उनका आरोप है कि प्रशासन उनकी भावनाओं और आपत्तियों को नजरअंदाज कर बलपूर्वक जनसुनवाई आयोजित करने की कोशिश कर रहा है।

धरना स्थल पर समर्थन देने पहुंचे कांग्रेस के छत्तीसगढ़ सह-प्रभारी जारीता जैतफलंग, खरसिया विधायक उमेश पटेल और लैलूंगा विधायक विद्यावती सिधार ने ग्रामीणों के आरोपों का समर्थन करते हुए,सरकार पर जनभावनाओं को दबाने की गंभीर टिप्पणी की नेताओं ने कहा कि यह संघर्ष केवल ग्रामीणों का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के भविष्य और सम्मान की लड़ाई है।

नेताओं ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा—
“प्रशासन ने जनभावनाओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर जबरिया जनसुनवाई कराने की कोशिश की है,यह लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन है,अगर स्थानीय लोग ही अपनी ज़मीन और भविष्य के सवालों पर सुने नहीं जाएंगे, तो जनसुनवाई का अर्थ ही समाप्त हो जाता है।”

प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि जब तक प्रस्तावित जनसुनवाई रद्द नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
धरना स्थल पर नारा गूंज रहा है—
“जल-जंगल-ज़मीन हमारा अधिकार—नहीं देंगे किसी को एक इंच जमीन।”
उधर, बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है, और हालात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।










