मोदी सरकार के नये श्रम कानून में मौलिक अधिकारों का हनन :- शाहिद भाई

राजनांदगाव। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री शाहिद भाई ने केंद्र सरकार द्वारा नये श्रम कानून में बदलाव पर कटाक्ष करते हुए कहा कि इस कानून से जहां श्रमिकों के मौलिक अधिकारों का हनन होगा, वहीं मजदूरों के छटनी पर सरकार का नियंत्रण नहीं रहेगा, क्योंकि पहले जब कांग्रेस की सरकार ने श्रम क़ानून बनाया था जहां 100 से अधिक कर्मचारी होते थे,वहां छटनी के पूर्व सरकार की अनुमति आवश्यक थी, लेकिन अब नए कानून में 300 से कम किसी कंपनी में कर्मचारी है,तो वह  सरकार के बिना अनुमति के मजदूरों की छटनी कर सकता है।

पूंजीवादी मानसिकता के चलते

जो नौकरी की अनिश्चितता के साथ अधिनायक वाद का प्रमाण है, इसी प्रकार मजदूर अपनी जायज मांगों के लिए भी प्रदर्शन नहीं कर सकेंगे उन्हें प्रदर्शन के 14 दिन पहले नोटिस देना होगा नोटिस नहीं देने की दशा में हुए प्रदर्शन के लिए वे कानूनी रूप से दंड के भागी होंगे,यह मजदूरो के मौलिक अधिकारों पर सीधा-सीधा हनन है,वही 8 घंटे के अलावा 12 घंटे कार्य की छूट से श्रम शक्ति भी घटेगी इस कानून में सबसे दुखद पहलू यह है, कि रात्रि पाली के कार्य में महिलाओं के परिवारों जिम्मेदारियों पर विपरीत असर के साथ उनकी सुरक्षा किस प्रकार से होगी यह भी चिंतनीय विषय है।

अब 8 की जगह 12 घंटे कार्य करने की अनिवार्यता

महिला श्रमिकों के बच्चों के लिए पालना घर की भी व्यवस्था किए जाने का प्रावधान अनिवार्य नहीं है, प्रत्येक राज्य सरकार अपने श्रम कानून बनाने होंगे, जो अन्य राज्यों से भिन्न होने में श्रम कानून में असमानता घातक है,इसके अलावा श्रम कानून में बदलाव सिर्फ पूंजीवादी मानसिकता और नियोजक के हितकारी और मजदूरों के साथ अन्यायकारी नीतियों से ओतप्रोत है, जबकि कांग्रेस सरकार मजदूर हित पर जोर के साथ रोजगार की सुरक्षा एवं स्थिरता के लिए कर्मचारी छटनी पर कड़ी शर्त लागू की थी, जिसे वर्तमान भाजपा सरकार ने शिथिल कर दिया है,जो कि मज़दूर साथियों के साथ घोर अन्याय है।

रिपोर्टर राशिद जमाल सिद्दीकी