रायगढ़ । आज की दुनिया में सफलता अक्सर पद और प्रतिष्ठा से आंकी जाती है, लेकिन कुछ युवा अपनी प्रतिभा और मेहनत को मानवता की सेवा में समर्पित करने का संकल्प लेते हैं,ऐसी ही एक युवा वैज्ञानिक हैं,रायगढ़ की बेटी हिमानी चौरसिया, जो कैंसर को हराने वाली दवा के आविष्कार की दिशा में अपने कदम बढ़ा चुकी हैं, इसी मिशन के तहत वह फ्रीबर्ग यूनिवर्सिटी, स्विट्जरलैंड में पीएचडी करने के लिए रवाना हो गई हैं।

स्विट्जरलैंड दुनिया में रसायनशास्त्र और जीवनरक्षक दवाओं के क्षेत्र में अग्रणी माना जाता है, यहां रसायन विज्ञान में सर्वाधिक नोबेल पुरस्कार मिले हैं,अब इसी प्रतिष्ठित परंपरा के बीच हिमानी भी अपना योगदान देने जा रही हैं।
रायगढ़ से स्विट्जरलैंड तक—हिमानी का प्रेरक सफर
केंद्रीय विद्यालय रायगढ़ से पढ़ाई शुरू करने वाली हिमानी बचपन से ही मेधावी रही हैं,दसवीं में उन्होंने देश में सातवां स्थान प्राप्त किया। कोविड काल के कारण 12वीं में मेरिट सूची नहीं बनी, फिर भी हिमानी ने अपने लक्ष्य की राह नहीं छोड़ी,गुरु घासीदास विश्वविद्यालय से स्नातक में उन्होंने द्वितीय स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा सिद्ध की।

हिमानी के पिता देवव्रत चौरसिया बताते हैं कि बेटी शुरू से ही मेहनती और लक्ष्य के प्रति समर्पित रही है,वे चाहते थे कि हिमानी यूपीएससी की तैयारी करे, लेकिन हिमानी का मन विज्ञान के क्षेत्र में कुछ नया करने के लिए दृढ़ था।
जेएनयू बना टर्निंग प्वाइंट
सीयूईटी में उत्तीर्ण होने के बाद हिमानी का प्रवेश जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में हुआ, जिसने उनके करियर की दिशा तय कर दी, उन्होंने बताया कि मीडिया में दिखाई जाने वाली छवि के उलट, जेएनयू में उन्हें उत्कृष्ट प्रोफेसर, बेहतर वातावरण और ‘आज़ादी’ का असली अर्थ समझने को मिला। यहीं से उन्होंने रिसर्च को अपना लक्ष्य बनाया,एमएससी दौरान उन्होंने ऑर्गेनिक सिंथेसिस विषय में एक वर्ष का रिसर्च प्रोजेक्ट किया, जिसने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया।

कैंसर की दवा पर विशेष शोध
फ्रीबर्ग यूनिवर्सिटी में हिमानी को जिस प्रोजेक्ट पर चयन मिला है, उसमें उन्हें ऐसे ऑर्गेनिक कंपाउंड डिजाइन करने हैं,जो एंटी-कैंसर गुणों वाले हों। हिमानी का कहना है कि गत 20 वर्षों में कैंसर के लिए कोई नई एंटीबायोटिक विकसित नहीं हुई, और आज भी 1950 के दशक की दवाएँ उपयोग की जा रही हैं,इसी कारण उन्होंने इस दिशा में शोध करने का निर्णय लिया।

कठिन चयन प्रक्रिया में मिली सफलता
फ्रीबर्ग विवि में इस प्रोजेक्ट के लिए पूरी दुनिया से आवेदन आते हैं, लेकिन केवल तीन सीटें होती हैं। हिमानी ने अंग्रेजी दक्षता परीक्षा, दो इंटरव्यू, डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन और प्रोफेसर की अनुशंसा—सभी चरण सफलता से पार किए।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हाल ही में हिमानी का सम्मान किया, जिससे पूरे रायगढ़ में खुशी की लहर है।

मानवता के लिए काम करने का संकल्प
हिमानी का सपना है कि वे ऐसी दवा विकसित करने में योगदान करें जो कैंसर जैसी घातक बीमारी को परास्त कर सके,वह चाहती हैं कि एक दिन उनका नाम भी उन महान वैज्ञानिकों की सूची में शामिल हो जिन्होंने दुनिया को नई दिशा दी है,रायगढ़ से स्विट्जरलैंड तक की इस प्रेरक यात्रा पर हिमानी आज रवाना हो गईं, पूरे शहर को उनसे गर्व है और सभी को उम्मीद है कि यह बेटी विज्ञान की दुनिया में नया इतिहास लिखेगी।










