रायगढ़ में करियर मार्गदर्शन कार्यक्रम को लेकर उठे सवाल, विपक्ष ने कहा“सरकारी कार्यक्रम नहीं, राजनीतिक शो”


रायगढ़। रायगढ़ के रामलीला मैदान में आयोजित करियर मार्गदर्शन कार्यक्रम जहां एक ओर सरकार ने बड़े उत्साह के साथ प्रस्तुत किया, वहीं दूसरी ओर इस आयोजन को लेकर विरोधी दलों और सामाजिक संगठनों ने कड़ी आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं, उनका कहना है कि युवा हितों के नाम पर किए गए इस भव्य शो का उद्देश्य शैक्षणिक मार्गदर्शन से अधिक राजनीतिक लाभ उठाना था।



“युवाओं को प्रेरणा नहीं, राजनीति परोसने की कोशिश”—विरोधियों का आरोप

विरोधियों का कहना है कि मंच पर प्रेरक वक्ताओं से ज्यादा राजनीतिक चेहरों की मौजूदगी और लंबे भाषणों में सरकार की योजनाओं का प्रचार यह साबित करता है कि यह युवा सम्मेलन नहीं बल्कि एक राजनीतिक मंच था,कई लोगों ने सवाल उठाया कि जब प्रदेश को बेहतर शिक्षण सुविधाएँ चाहिए, तब युवाओं को फ्लेशीआयोजन से बहलाने की कोशिश क्यों की जा रही है?

5–5 हजार की घोषणा पर भी उठे सवाल

वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी द्वारा सौ से अधिक बच्चों को 5–5 हजार रुपये स्वेच्छानुदान देने की घोषणा को भी विरोधियों ने “लोकलुभावन और चुनावी लाभ पाने की चाल” बताया, उनका कहना है कि यदि सरकार वास्तव में शिक्षा को लेकर गंभीर होती तो



स्कूलों की स्थिति सुधारती, शिक्षकों की कमी दूर करती

और छात्रों के लिए स्थायी सहायता योजनाएँ बनाती,
ना कि मंच से भीड़ ताली बजाए इसलिए घोषणाएँ की जातीं।




“भव्य कार्यक्रम, लेकिन समस्याएँ जस की तस”सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि आयोजन में रोशनी, कैमरे और तालियों की गूंज तो थी, लेकिन युवाओं की बेरोजगारी,कॉलेजों में संसाधनों की कमी,ग्रामीण छात्रों के लिए मार्गदर्शन की अनुपलब्धता जैसे असली मुद्दे कहीं भी चर्चा में नहीं आए।


आनंद कुमार का सम्मान, लेकिन सवाल आयोजन के मकसद पर



सुपर 30 के संस्थापक पद्मश्री आनंद कुमार का आना युवाओं के लिए प्रेरणादायक था, लेकिन विरोध का कहना है कि सरकार ने उनके नाम और लोकप्रियता को अपने राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया,कई छात्र भी मंच पर भारी भीड़ और राजनीति से भरे भाषणों से असहज दिखाई दिए।

“युवा सम्मेलन या राजनीतिक सभा?”—जनता में भी उठे सवाल

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि सचमुच करियर मार्गदर्शन ही उद्देश्य था, तो कार्यक्रम मेंकरियर विशेषज्ञ,काउंसलर,और विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवरको बुलाया जाना चाहिए था,ना कि कार्यक्रम को जनप्रतिनिधियों का शक्ति प्रदर्शन बना दिया जाए।



अन्य आयोजन भी विवादों में

पुसौर और सरिया में होने वाले कार्यक्रमों को लेकर भी अब चर्चा तेज है कि क्या वहाँ भी यही राजनीतिक माहौल दोहराया जाएगा या युवाओं को वास्तविक मदद मिलेगी,यह तीखा विरोध सरकार के प्रयासों को कटघरे में खड़ा कर रहा है, सवाल यह है कि क्या ऐसे आयोजनों से वास्तव में युवाओं को दिशा मिलेगी, या यह सिर्फ बड़े-बड़े मंचों पर चमकती रोशनी के पीछे छिपी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएँ हैं…?बड़े बड़े मंचों से बड़ी बड़ी घोषणा कर दी जाती है, पर वास्तविक धरातल में बेरोजगार युवा प्रतिनिधियों के पीछे चप्पल घिसते थक जाता है,कोई सुनने वाला नहीं है…

बच्चे तो सडको पर भी नजर आयें

इस पूरे आयोजन में बच्चों सही तकरीके बैठने की भी व्यवस्था नहीं नहीं थी, जो स्कूल के बच्चे देर से पहुंचे, वो तो ईदगाह की दिवाल पर भी बैठें और कितनें बच्चे तो सडक पर ही रहें इस पूरे आयोजन के लिए विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी द्वारा आई कार्ड जारी किया गया उसमें ना तो किसके हस्ताक्षर थें, ना किसी का नाम और तो और मिडिया के लिए जो जगह आरक्षित तो थी,  उसमें भी अधिकारी कर्मचारी ही बैठें नजर आये साथ ही बार बार मंच से घोषणा की जा रही थी, कि कोई बच्चा अपनी जगह से नहीं उठेगा, इसके बावजूद कई बच्चे तो उठकर चल दियें कितनी कुर्सीया तो खाली हो गई थी,