वीर शहीद कर्नल विप्लव, अनुजा, अबीर के शहीद दिवस पर शहर में कई कार्यक्रम…..

रायगढ़।वीर शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी का बलिदान दिवस शौर्य दिवस के रूप में गुरुवार को पूरे दिन मनाया गया, इस अवसर पर पूरे शहर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए,शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी स्टेडियम में स्थापित उनकी प्रतिमा में पुष्पांजलि अर्पित कर , बालवीर अबीर त्रिपाठी की प्रतिमा और समाधि स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित किया गया,इस दौरान एनसीसी, एनएसस के छात्र, पूर्व सैनिक, संगठन के सदस्य, परिवार जन एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक शामिल हुए,साथ ही कमला नेहरू पार्क में बच्चों के लिए देशभक्ति थीम पर चित्रकला उत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 300 से अधिक बच्चे शामिल हुए। चित्रकला उत्सव के समापन पश्चात बच्चों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया, इस दौरान विभिन्न सामाजिक संगठनों का विशेष सहयोग रहा।

उत्सव जैसा मना कर्नल विप्लव त्रिपाठी का बलिदान दिवस

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पुलिस अधीक्षक दिव्यांग पटेल ने कहा कि वीर शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी के बलिदान को रायगढ़ सहित पूरे देशवासी याद रखेंगे, उनकी बहादुरी को कभी भुलाया नहीं जा सकता, आज की हमारी पीढ़ी देश के लिए उनके योगदान को हमेशा याद करेगी। उन्होंने कहा कि वो आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके कार्य उनकी स्मृति हमारे लिए प्रेरणा के रूप में हमेशा मौजूद रहेगी,आज उनके बलिदान दिवस को मनाने पूरा रायगढ़ उमड़ पड़ा है,हमें गर्व है, कि हम उनकी जन्मभूमि में कार्य कर रहे हैं।

जिले के शहीद परिवारों का शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी मेमोरियल ट्रस्ट समेत कई संस्थाओं ने किया सम्मान


उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि बालवीर अबीर त्रिपाठी, अनुजा त्रिपाठी और कर्नल विप्लव त्रिपाठी की बहादुरी को अपना प्रेरणा स्त्रोत बनाकर अपने लक्ष्य को निर्धारित करें, हर क्षेत्र में अपना सर्वश्रेष्ठ देकर देशसेवा में अपना योगदान दिया जा सकता है।



जिला सैनिक कल्याण बोर्ड के प्रमुख कमांडर हरीश तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी रायगढ़ की धरती पर पैदा हुए,हर रायगढ़ वासियों को वीर शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी और उनके परिवार पर गर्व है,जिस दिन जो पैदा होता है,उसी के साथ इसके मरने की उल्टी गिनती शुरू हो जाती है, जो पैदा हुआ है वह मरेगा पर कैसे यह मायने रखता है, बलिदान होना सबसे बड़ा गर्व है, और कर्नल विप्लव ने तो अपने पूरे परिवार समेत बलिदान दिया है,इससे बड़ा बलिदान कुछ हो ही नहीं सकता,धन्य हैं उनके माता पिता जिन्होंने कर्नल विप्लव जैसे सपूत को जन्म दिया। धन्य है रायगढ़ की धरती जहां वह जिए।
जिले के शहीद परिवारों का शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी मेमोरियल ट्रस्ट समेत कई संस्थाओं ने किया सम्मान



शहीद कर्नल त्रिपाठी की माताजी श्रीमती आशा त्रिपाठी ने कार्यक्रम में पहुंचे सभी बच्चों उनके अभिभावकों और शहर के गणमान्य नागरिकों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि शहीद विप्लव त्रिपाठी आप सबके अपने थे, उनके बलिदान दिवस पर यह आयोजन सिर्फ उनके विचारों और योगदानों के स्मरण का अवसर नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य है कि लोग सैन्य सेवाओं के बारे में भी जागरूक हों,उन्होंने बताया कि शहीद कर्नल त्रिपाठी शहर के पहले सैन्य अफसर हैं, जिन्होंने नेशनल डिफेंस अकादमी में प्रवेश लिया, जिसने शहर और आस-पास के दूसरे बच्चों को भी प्रेरित किया, श्रीमती त्रिपाठी ने नन्हें बच्चों द्वारा कैनवास में अपने कल्पनाओं से उकेरी तस्वीरों की सराहना करते हुए कहा कि इन चित्रों से बच्चों की रचनात्मकता के साथ उनके देशप्रेम की भावना बहुत ही सुंदर तरीके से झलक रही है।


कर्नल विप्लव त्रिपाठी के पिता श्री सुभाष त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि शौर्य दिवस पूरे रायगढ़ का कार्यक्रम है,कर्नल विप्लव पूरे रायगढ़ का बेटा है, अनुजा पूरे रायगढ़ की बेटी और अबीर पूरे रायगढ़ का नाती है, इस बार कई संस्थाओं ने शहीद परिवारों का सम्मान किया उम्मीद करता हूं कि अगले वर्ष इनकी संख्या दुगनी होगी।

इस अवसर पर शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी के पिता सुभाष त्रिपाठी, माता श्रीमती आशा त्रिपाठी, कोसा बटालियन से कर्नल कर्नल अभिषेक उनियाल, कर्नल तिवारी, शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी मेमोरियल ट्रस्ट के  राजेश पटनायक,  रामचंद्र शर्मा, कर्नल सैन्य अधिकारी,  राहुल शुक्ला,  अशोक सिंह, युवराज सिंह आजाद, यामिनी देवांगन अभिषेक उपाध्याय सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।


शौर्य दिवस बना उत्सव दिवस
13 नवंबर की तारीख़ ना केवल रायगढ़, छत्तीसगढ़ बल्कि देश के सैन्य इतिहास की बड़ी घटना मानी जाती है, ऐसा इसलिए क्योंकि चार साल पहले 13 नवंबर 2021 को मणिपुर में घात लगाकर किये गये एक कायराना आतंकी हमले में 46 आसाम रायफ़ल्स के सीओ कर्नल विप्लव त्रिपाठी अपने चार जवानों और पत्नि अनुजा बेटे अबीर के साथ वीरगति को प्राप्त हुए थे। इस घटना के बाद शहीद कर्नल विप्लव के माता पिता सुभाष आशा त्रिपाठी ने ट्रस्ट की स्थापना की, इसी ट्रस्ट के जरिए शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी की जयंति और शहादत दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। इसी कड़ी में इस साल 13 नवंबर को शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा “शौर्य दिवस” मनाया गया,जिसमें सुबह से लेकर रात तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए,अंतिम कार्यक्रम शहीद परिवारों के सम्मान के दौरान कोसा बटालियन के कर्नल अभिषेक उनियाल ने कहा मैंने इस कार्यक्रम के बारे में सुना था पर यह इतना गौरवशाली और भव्य आयोजन है कि यह एक उत्सव बन गया है,नमन करता हूं कर्नल विप्लव त्रिपाठी के माता पिता को जो इस उम्र में अपने जिले के लोगों में सेना के प्रति जागरूकता की अलख जगाने के लिए प्रयासरत हैं, उनका प्रयास दिख रहा है,ऐसे आयोजन विरले होते हैं, उन्होंने जो खोया वही इसका मूल्य जानते हैं, पर वो जो कर रहे हैं यह अदभुत है।



जिला सैनिक कल्याण बोर्ड के प्रमुख कमांडर हरीश तिवारी ने कहा कि मैं आज सुबह 8 बजे से कर्नल विप्लव त्रिपाठी, मैडम अनुजा और बालवीर अबीर के बलिदान दिवस के आयोजनों में शामिल हूं अभी रात के 8 बज रहे हैं और अंतिम कार्यक्रम जारी है,हमने आज का पूरा दिन शौर्य दिवस मनाया उनका बलिदान दिवस अब उत्सव बन गया है, जिसमें हर वर्ग और समूह के लोग स्वस्फूर्त शामिल हो रहे हैं,धन्य है रायगढ़ की धरती जहां कर्नल विप्लव ने जन्म लिया।

इन संस्थाओं ने किया शहीद परिवारों का सम्मान
शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी के शौर्य दिवस पर कमला नेहरू उद्यान में चित्रकला उत्सव और पॉलिटेक्निक ऑडिटोरियम में जिले के 12 शहीद परिवारों का सम्मान किया गया। जिसमें शहर की प्रमुख संस्थाओं जिसमें मॉर्निंग वॉकर ग्रुप, जेसीआई रायगढ़ (चित्रकला उत्सव की पूरी जिम्मेदारी), बजरंग दल, दिव्य शक्ति, जिला एमेच्योर कबड्डी संघ, अग्रसेन सेवा संघ, लाक्या फाउंडेशन, नव सृजन संस्था काव्य वाटिका आदि। शहीद परिवारों को अपने स्थान से कार्यक्रम स्थल लाने के लिए जिला पुलिस ने व्यवस्था की थी। सम्मान कार्यक्रम के दौरान लाक्या फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री ओम साहू ने शहीद परिवार की बेटियों के 12वीं तक पढ़ाने की घोषणा की। साथ ही जिला एमेच्योर कबड्डी संघ के अध्यक्ष रघुवीर सिंह वाधवा ने भी शहीद परिवार की 2 बेटियों के पढ़ाई के खर्च के वहन की घोषणा की।



रायगढ़ नहीं पूरे देश के गौरव शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी


शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी का जन्म 20 मई 1981 को रायगढ़ के जिला चिकित्सालय में हुआ, उनकी माता श्रीमती आशा त्रिपाठी और पिता श्री सुभाष चंद्र त्रिपाठी हैं, उनके छोटे भाई कर्नल अनय त्रिपाठी भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी की प्राथमिक शिक्षा कॉर्मल कॉन्वेंट स्कूल में हुई इसके बाद वह उन्होंने सैनिक स्कूल में रीवा से  हायर सेकेंडरी की शिक्षा पूरी की राष्ट्रीय रक्षा अकादमी पुणे में तीन वर्ष शिक्षा प्राप्त करने के बाद भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून से 2003 में पास आउट होने के बाद उन्हें लेफ्टिनेंट के पद पर भारतीय सैन्य सेवा में कमीशन प्राप्त हुआ वह कुमाऊँ रेजिमेंट के ऑफिसर बने। उनकी पहली पोस्टिंग सियाचिन में हुई। कुपवाड़ा में  विप्लव के मार्गदर्शन में भारतीय सेना के जवानों ने पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ करने वाले 6 आतंकवादियों को मार गिराया था। मेजर के पद पर पदोन्नत होने के बाद आईएमए देहरादून में इंस्ट्रक्टर के पद पर पदस्थना हुई, वहीं पदस्थ रहते हुए उनका विवाह बिलासपुर की अनुजा शुक्ला से हुई,आईएमए में पदस्थ रहते हुए ही उनकी यूनिट को संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना के लिए दक्षिण अफ्रीका के कांगों में भेजा गया जहां वे एक साल तक रहे,लौटने के बाद उनकी पदस्थापना लखनऊ में हुई, जहां  उन्हें 5 फरवरी 2015 को पुत्ररत्न अबीर त्रिपाठी के रूप में प्राप्त हुआ,  2016 में कर्नल विप्लव त्रिपाठी और उनके छोटे भाई कर्नल अनय त्रिपाठी दोनों का चयन एक साथ आर्मी स्टॉफ कॉलेज  वेलिंगटन के लिए हुआ था।

वेलिंगटन में रहते हुए ही उन्हें कर्नल के पद पर पदोन्नत कर दिया गया था, इनको मथुरा स्ट्राइक कोर 1 में जनरल स्टाफ ऑफिसर 1 के रूप में पदस्थ किया गया, जुलाई 2019 में उनका चयन कमांड ऑफिसर के पद पर 46 असम राईफल्स आइजोल(मिजोरम) में हुआ, यहां उन्होंने तस्करों के खिलाफ धड़ाधड़ कार्रवाई शुरू कर दी,कर्नल विप्लव की इस उपलब्धि पर वहां के राज्यपाल ने कर्नल विप्लव को न केवल पुरस्कृत और सम्मानित किया था, बल्कि एक एन्टी ड्रग स्कॉड के गठन के लिए भी उन्हें जिम्मेदारी दी थी, आइजोल से जून 2021 में  इनकी पूरी बटालियन को आतंकवाद प्रभावित इलाका मणिपुर के खुगा में भेजा गया।


उनकी टीम ने 40 करोड़ रूपये से अधिक कीमत के हेरोइन से लदे एक ट्रक को पकड़ लिया था। 12 नवंबर 2021 को कर्नल विप्लव अपनी पत्नी अनुजा और पुत्र अबीर के साथ म्यांमार सीमा से लगे बेहांग बॉर्डर पर स्थित भारतीय पोस्ट के निरीक्षण के लिए गए हुए थे।  13 नवंबर को जब कर्नल विप्लव त्रिपाठी अपने काफिले के साथ अपने मुख्यालय लौट रहे थे तब बेहांग पोस्ट और दूसरी पोस्ट के बीच आतंवादी संगठन द्वारा लगाए गए एंबुश में फंस गए। अलगाववादियों ने आईडी लगाकर उनके पायलट वाहन को उड़ा दिया और उसके बाद दोनों तरफ से कर्नल विप्लव जिस वाहन में थे उसमें गोलियों की बौछार कर दी। तब भी कर्नल विप्लव त्रिपाठी अपनी कारबाइन और सर्विस रिवाल्वर की आखिरी गोली तक अलगवावादियों का मुकाबला करते रहे लेकिन अंतत: अपनी पत्नी अनुजा और पुत्र अबीर के साथ वीरगति को प्राप्त हो गए।