रायगढ़/सारंगढ़।सारंगढ़ तहसील अंतर्गत प्रस्तावित लाईमस्टोन ओपन खदान परियोजना को लेकर क्षेत्र में जनाक्रोश दिनों-दिन तेज होता जा रहा है। ग्रीन सस्टेनेबल कंपनी को 500 एकड़ से अधिक भूमि पर खनन की अनुमति मिलने के विरोध में सोमवार को सैकड़ों ग्रामीणों ने रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया। ग्रामीणों की मांग है कि 24 सितंबर को प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई को तत्काल निरस्त किया जाए।
प्रशासन अड़ा, जनप्रतिनिधियों से लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश | कलेक्टर कार्यालय का घेराव, लगाए “कलेक्टर हाय-हाय” के नारे
इस विरोध प्रदर्शन में स्थानीय विधायक उत्तरी जांगड़े और जनपद पंचायत अध्यक्ष ममता राजीव सिंह भी ग्रामीणों के साथ शामिल हुए। उन्होंने साफ कहा कि यह परियोजना क्षेत्र की हरियाली, खेती, पर्यावरण और जनजीवन को पूरी तरह बर्बाद कर देगी।
500 एकड़ भूमि पर खनन की अनुमति, हरे-भरे खेतों के उजड़ने का खतरा
सारंगढ़ लात नाला किनारे बसे लालघुरवा, जोगनीपाली, कपिस्दा, सरसरा और धौराभांठा जैसे गांवों की भूमि पर इस खदान परियोजना की अनुमति दी गई है, ग्रामीणों का कहना है कि यहां की उपजाऊ भूमि ही उनकी आजीविका का मुख्य स्रोत है,
यदि खदान शुरू होती है, तो धूल, शोर और भारी वाहनों की आवाजाही से न केवल खेत बर्बाद होंगे, बल्कि लोगों की सेहत और जल स्रोत भी प्रभावित होंगे।
पूर्व में भी सौंपा गया ज्ञापन, लेकिन प्रशासन अड़ा
16 सितंबर को भी सैकड़ों ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर परियोजना के खिलाफ ज्ञापन सौंपा था,ज्ञापन में खनन के कारण होने वाले पर्यावरणीय, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों का उल्लेख किया गया था, बावजूद इसके, प्रशासन ने जनसुनवाई को लेकर कोई सकारात्मक पहल नहीं की।
फर्जीवाड़े की आशंका, जनसुनवाई की निष्पक्षता पर सवाल
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि जनसुनवाई के दिन कंपनी द्वारा बाहरी लोगों को लाकर समर्थन में बयान दिलवाए जाएंगे, स्थानीय लोगों को डर है कि पूरी प्रक्रिया एक दिखावा बनकर रह जाएगी, यह भी आरोप है कि पहले भी ऐसी परियोजनाओं में इसी तरह की रणनीतियाँ अपनाई गई हैं, जिससे वास्तविक प्रभावितों की आवाज दबा दी जाती है।
कलेक्टर की प्रतिक्रिया, लेकिन ग्रामीण असंतुष्ट
कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे ने विरोध जताने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल से कहा कि वे अपना विरोध जनसुनवाई के दिन लिखित में दर्ज करें। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना है, कि जब पूरी प्रक्रिया ही पूर्व-निर्धारित लग रही है, तब जनसुनवाई में हिस्सा लेने का कोई मतलब नहीं रह जाता।
विरोध को मिल रहा व्यापक जनसमर्थन
अब यह आंदोलन सिर्फ ग्रामीणों तक सीमित नहीं रह गया है, इसमें सरपंच, जिला पंचायत सदस्य, जनपद अध्यक्ष और विधायक तक खुलकर साथ आ चुके हैं, जनसुनवाई रद्द करने की मांग अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेती दिख रही है, यदि प्रशासन ने जल्द सुनवाई नहीं की, तो विरोध और भी व्यापक और उग्र हो सकता हैं।










