रायगढ़। जिले में आयोजित चालीस वें चक्रधर समारोह के समापन के बाद एक अप्रत्याशित स्थिति सामने आई है, कार्यक्रम स्थल से पद्मश्री गायक कैलाश खेर के नाम का प्रशस्ति पत्र जमीन पर पड़ा हुआ मिला है,यह प्रमाण पत्र समारोह के दौरान कलाकारों को सम्मान स्वरूप प्रदान किया गया था।

प्रशस्ति पत्र के साथ कुछ अन्य पत्र भी पाए गए हैं, जिन पर संभवतः कैलाश खेर के बैंड ‘कैलासा’ के अन्य सदस्यों के नाम दर्ज थे, यह स्पष्ट नहीं है,कि ये प्रमाण पत्र आयोजन समिति की ओर से छोड़े गए थे,या फिर कलाकारों द्वारा अनजाने में छोड़ दिए गए।
क्या है मामला…?
जानकारी के अनुसार, चक्रधर समारोह के समापन के एक दिन बाद जब टेंट हटाए जा रहे थे, तब स्थानीय युवाओं ने कुछ प्रशस्ति पत्रों को कचरे के पास पड़ा हुआ पाया, उनमें से एक पर कैलाश खेर का नाम स्पष्ट रूप से लिखा हुआ था।
इन प्रशस्ति पत्रों को स्थानीय निवासी ने एकत्र कर सुरक्षित कर लिया है, स्थानीय निवासी का कहना है, कि यह प्रमाण पत्र यदि वाकई सम्मान का प्रतीक हैं, तो उन्हें इस तरह जमीन पर नहीं होना चाहिए था, इससे कलाकारों अपमान ही हैं।
आयोजन पर उठे सवाल
चक्रधर समारोह को लेकर इस वर्ष राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने बड़े स्तर पर तैयारियां की थीं, समापन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मौजूद थे,कलाकारों को आमंत्रित कर उन्हें मंच से सम्मानित किया गया था।

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लेकिन प्रमाण पत्रों का इस तरह जमीन पर पाया जाना आयोजन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करता है, इस विषय में अभी तक आयोजकों या जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

धार्मिक स्थल की स्थिति भी चर्चा में
उसी स्थल पर गणेश उत्सव के तहत गणेश प्रतिमा भी स्थापित की गई थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, कार्यक्रम के समापन के बाद वहां पूजा की सामग्री और भोजन के प्लेट आदि भी बिखरे हुए मिले। इससे आयोजन के धार्मिक पक्ष की देखरेख को लेकर भी चर्चा हो रही है।
आगे होगा क्या भविष्य …?
फिलहाल प्रशस्ति पत्र सुरक्षित हैं,और स्थानीय लोगों का कहना है,कि यदि प्रशासन उन्हें वापस लेना चाहता है, तो वे इसे सौंपने को तैयार हैं,यह स्पष्ट नहीं,हैं कि यें मामला जाँच के दायरे में आयेगा की नहीं चूकिं हमने समारोह के पूर्व इस बात कहाँ था की केवल अपने स्वार्थ के इस समारोह का आयोजित होता हैं।

जबकि वही जिला प्रशासन भी इस पूरे मामले कुछ भी कहने से बचता नजर आ रहा हैं, हमने उच्च अधिकारी से पूरा मामला जानने कि कोशिश दूरभाष पर की लेकिन उच्च अधिकारीयों नंबर लगतार कवरेज के बाहर रहा।










