ग्रामीणों के भेष में अडानी के गुर्गे करते हैं,गुंडागर्दी…!

रायगढ़। महाजेंको से एमडीओ लेकर कोयला खनन की ठेकदारी कंपनी अडानी समूह की मनमानी चरम पर है, धीरे-धीरे वह रायगढ़ में पैठ बनाने छोटे उद्योगों को निगलने की फिराक में चालें चलनी शुरू कर दी है,बड़े भंडार के कोरबा वेस्ट को लेना अडानी समूह की शुरुआती योजनाओं में से एक है, कंपनी के अधिकारी दिल्ली, रायपुर से लगातार प्रशासनिक दबाव बनाए हुए हैं, तभी तो अडानी के माइनिंग से प्रभावित होने वाले ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे हैं,कंपनी पर आरोप भी लगा रहे हैं, कि उनकी मर्जी के बिना फर्जी डॉक्यूमेंट तैयार करके खनन के लिए जंगलों को काटा जा रहा है,पर उनकी आवाज उन्हीं जंगलों में दबकर रह जाती है। 

पत्रकारों को धमकाने और भूपेश बघेल का रास्ता रोकने वाले अडानी के गुर्गे समान

सत्ता के सहयोग की मद में चूर और अपने गुंडों के भरोसे अडानी कंपनी के अधिकारियों ने मनमानी करना अभी से शुरू कर दिया है,जमीन हड़पने और उसी के मालिक से मारपीट कर उल्टा मुकदमा ठोकना सामान्य है, पर पत्रकारों से बदसलूकी और उन्हें धमकाना उनकी प्रशासन में हनक दिखाता है।

अडानी के गुर्गों पर कार्रवाई से डर गई रायगढ़ पुलिस


विदित हो कि 6 अगस्त को कलेक्ट्रेट परिसर में अदानी कंपनी के गुर्गों ने पत्रकारों से बदसलूकी और जान से मारने की धमकी दी थी,तुरंत ही पत्रकारों ने इस बाबत शिकायत चक्रधर नगर थाने में दी, उसके बाद सभी पत्रकारों ने एसपी से मिलकर इस मामले में जांच को निवेदन किया था,पूरे घटनाक्रम को 25 दिन हो चुके हैं अभी तक मामला जस का तस पड़ा हुआ है।



सवालिया निशान पुलिस पर है, क्योंकि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर खुलेआम उन्हीं की मौजूदगी में हमला होता है,और आज 25 दिन बाद भी वह हाथ पर हाथ धरकर बैठे हुई है, सनद रहें यह वही रायगढ़ पुलिस है जो जुलाई महीने के पहले सप्ताह में आसपास के जिलों की फोर्स लेकर तमनार के मुड़ागांव के जंगलों को काटने में अडानी कंपनी को सहयोग कर रही थी, तब मुड़ागांव को छावनी में बदल दिया गया था,ग्रामीणों को तो घुसते ही नहीं दिया गया, पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दे दिया है, कि जंगल कटेंगे किसी भी कीमत और कौन रोक सकता है रोक के दिखाओ।

पूर्व सीएम का रास्ता रोकने वाले और पत्रकारों को धमकाने वाले अडानी के गुर्गे

मुड़ागांव में जब जंगल कट रहे थे,तब विपक्ष या जो भी लोग ग्रामीणों के पक्ष में थे उनसे मिलने जा रहे थे, उन्हें पुलिस और प्रशासन द्वारा तमनार की बाहरी सीमा पर रोक दिया जा रहा था। तमनार के लोगों ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जो मुड़ागांव में जंगल कटाई के विरोध में आए थे, तो उनके मार्ग को रोकने वाले लोग वही थे,जो कलेक्ट्रेट परिसर में पत्रकारों को धमकाए थे, तब उन्होंने बीच सड़क पर अपनी गाड़ी खराब होने का बहाना बनाया था, और अब कलेक्टर से अपने जमीन, जंगल और खेत को खुशी खुशी कटवाने के समर्थन में मिलने गए चलित धनसुनवाई का पहला मामला है,स्पष्ट है अडानी कंपनी ने अपने गुंडों, गुर्गों को ग्रामीण के भेष में रखा है,जो उनके खिलाफ किसी भी आयोजन में अडानी का पक्ष लेने पहुंच जाते हैं, इससे प्रभावित 9 ग्राम पंचायत के 14 गांव के लोग पूरी तरह खौफ़जदा है,पुलिस प्रशासन सब अडानी अडानी खेल रहे हैं, बर्बाद हों रहा तो जल जंगल और जमीन।