रायगढ़। सांस्कृतिक नगरी रायगढ़ में आयोजित चक्रधर समारोह का आगाज़ इस बार विवादों के साथ हुआ है, समारोह के पहले दिन ही लोकप्रिय कवि डॉ. कुमार विश्वास के काव्य पाठ कार्यक्रम से पूर्व उन्हें ‘युग कवि’ कहे जाने को लेकर सोशल मीडिया पर विरोध की लहर चल पड़ी है।
जिला प्रशासन द्वारा जारी आमंत्रण पत्र और राज्य सरकार के प्रचार सामग्रियों में कुमार विश्वास के नाम के नीचे ‘युग कवि’ लिखा गया है, जिससे साहित्य और पत्रकारिता जगत में आलोचनाओं का दौर शुरू हो गया है,इस संबंध में वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार गिरीश पंकज ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, उन्होंने फेसबुक पोस्ट में लिखा —

“शर्मनाक!! कुमार विश्वास के नाम के नीचे ‘युगकवि’ लिखा गया है. यह विशेषण अपने आप में ‘युग’ शब्द का अपमान है। हल्की-फुल्की या मसखरी वाली कविताएं कब से युग की कविताएँ हो गईं?…”
उन्होंने इसे चाटुकारिता का उदाहरण बताते हुए जिला प्रशासन से पोस्टर में ‘युग कवि’ शब्द हटाने की मांग की है।

गिरीश पंकज ने न केवल इस विशेषण पर आपत्ति जताई, बल्कि आयोजन समिति की भाषा चयन नीति पर भी सवाल उठाया। उन्होंने हिंदी कवि सम्मेलन के पोस्टर को अंग्रेज़ी में जारी किए जाने को “भाषाई हीनता” बताया।
कुमार विश्वास की डिमांड भी चर्चा में
इस बीच, कवि कुमार विश्वास की आयोजकों से की गई मांगें भी चर्चा में हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने होटल से कार्यक्रम स्थल तक आने के लिए Audi या Mercedes जैसी लग्जरी गाड़ियों की मांग की थी। इसके जवाब में जिला प्रशासन ने उनके लिए Mercedes Maybach की व्यवस्था की इस बात पर भी सोशल मीडिया में प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

चक्रधर समारोह: सांस्कृतिक गरिमा बनाम शोहरत की चमक…?
ज्ञात हो कि रायगढ़ का चक्रधर समारोह एक प्रतिष्ठित 10 दिवसीय आयोजन है, जिसमें शास्त्रीय संगीत, नृत्य, वाद्य और लोककलाओं की उत्कृष्ट प्रस्तुतियां होती हैं। इसमें कवि सम्मेलन भी वर्षों से एक अहम आकर्षण रहा है। इस बार कवि कुमार विश्वास और गायक कैलाश खेर समारोह के प्रमुख आकर्षणों में हैं,हालांकि अब यह बहस तेज़ हो गई है, कि क्या लोकप्रियता के आधार पर किसी कवि को ‘युग कवि’ का दर्जा दिया जाना उचित है?
स्थानीय कवियों को भी मंच देने की मांग
इस पूरे विवाद के बीच गिरीश पंकज समेत कई लोगों ने रायगढ़ और आस-पास के स्थानीय युवा कवियों के लिए अलग से कवि सम्मेलन आयोजित करने की मांग की है, ताकि उन्हें भी उचित मंच और सम्मान मिल सके।

प्रशासन और आयोजन समिति की ओर से इस विवाद पर अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है,लेकिन बढ़ते विरोध को देखते हुए संभावना जताई जा रही है, कि आमंत्रण पत्र में संशोधन किया जा सकता है।
चक्रधर समारोह जैसे ऐतिहासिक आयोजन में इस तरह का विवाद निश्चित ही इसकी गरिमा पर प्रश्नचिन्ह लगाता है,अब देखने वाली बात यह होगी कि आयोजक इस पर क्या रुख अपनाते हैं,और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए क्या कदम उठाते हैं।










