रायगढ़। राज्यसभा सांसद बनने के बाद पहली बार चक्रधर समारोह का आयोजन अपने हाथ में लेते हुए कुमार देवेंद्र प्रताप सिंह ने जिस तरह से आयोजन समिति का गठन किया है, वह अब विवादों के घेरे में आ गया है,समिति में उनकी बहन उर्वशी देवी और प्राचार्य राजेश डेनियल को शामिल किए जाने से यह सवाल उठने लगे हैं,कि क्या इस बार चक्रधर समारोह में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है?

ऐसे में जब राजा चक्रधर सिंह दूर-दूर से कलाकारों को बुलाकर उनका सम्मान करते थे, अब वहीं स्थानीय कलाकारों को दरकिनार किया जा रहा है,विगत कई वर्षो से जिन कलाकारों ने अपनी मेहनत से समारोह को बुलंदी दी थी, उन्हें आयोजन से अलग कर दिया गया है,इससे स्थानीय कलाकारों में रोष है, और शहर में यह चर्चा का विषय बन गया है, कि क्या यह कला प्रेम है या कला विरोध…?
सूत्रों के अनुसार, इस वर्ष चक्रधर समारोह में आर्थिक अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है, कलाकारों को अधिक पेमेंट का वादा कर कम भुगतान किया जाना, एजेंट्स और कमीशन का खेल – इन सब बातों ने आयोजन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बताया जा रहा है, कि एक ही व्यक्ति के द्वारा सभी कलाकारों को बुक किया जा रहा है, जिससे पैसों के लेन-देन में पारदर्शिता की गुंजाइश नहीं बचती।

प्रशासन को चाहिए कि वह कलाकारों को दी जाने वाली राशि को अपने संज्ञान में ले और पारदर्शिता सुनिश्चित करे। अन्यथा यह समारोह व्यक्तिगत स्वार्थ और आर्थिक लाभ का जरिया बन जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में एक ही कलाकार को तीन बार बुलाया गया, जिसमें लगभग 50 लाख रुपये का भुगतान हुआ,वहीं एक स्थानीय कलाकार को भी ढाई लाख में बुक किए जाने की चर्चा है। ऐसे मामलों ने लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं – आखिर एक व्यक्ति ही क्यों पूरे समारोह को संचालित कर रहा है? किसे कितना भुगतान किया गया और किस आधार पर किया गया – ये सारी बातें अब तक पर्दे में हैं।

समारोह के नाम पर हो रहा ‘कलाकारी दमन’ अब बर्दाश्त नहीं – कलाकार
कलाकारों का कहना है कि यह सिर्फ आयोजन की नहीं, बल्कि उनकी वर्षों की साधना का अपमान है, पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग करते हुए उन्होंने प्रशासन से अपील की है, कि चक्रधर समारोह की गरिमा को बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप किया जाए,अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है, या यह प्रतिष्ठित सांस्कृतिक आयोजन भी राजनीति और लाभ की भेंट चढ़ता है।










