रायगढ़। रायगढ़ के सांस्कृतिक इतिहास में पहली बार चक्रधर समारोह की चयन समिति में कोई भी कलाकार शामिल नहीं किया गया है,राज्यसभा सांसद बनने के बाद देवेंद्र प्रताप सिंह और उनकी बहन उर्वशी देवी को इस वर्ष के चक्रधर समारोह की चयन समिति का हिस्सा बनाया गया है, और यही दोनों इस समिति के केंद्र में हैं।
चयन समिति में आखिर क्यों नहीं हैं, कलाकार…?
इस बार के आयोजन को लेकर संस्कृति प्रेमियों और कलाकारों में असंतोष देखा जा रहा है, क्योंकि अब तक हर वर्ष इस आयोजन में कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, लेकिन इस वर्ष कलाकारों की राय को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है।

चयन समिति में एकमात्र अतिरिक्त सदस्य के रूप में एक स्कूल प्राचार्य को शामिल किया गया है, जो प्रशासनिक अधिकारी हैं, लेकिन उनकी न तो कोई सांस्कृतिक पृष्ठभूमि है,और न ही किसी प्रकार की कलात्मक पहचान बताया जा रहा है, कि वे अपने मूल दायित्वों से दो महीने तक स्कूल से दूर रहकर रामलीला मैदान में अधिक समय दे रहे हैं।
चयन समिति कलाकारों का न होना कई सवाल खडे करता हैं…
स्थानीय कलाप्रेमियों का कहना है कि चक्रधर समारोह, जो महाराज चक्रधर सिंह की सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है, वह केवल राजनीतिक प्रभाव और प्रशासनिक निर्णयों का मोहरा नहीं बनना चाहिए,एक वरिष्ठ कलाकार ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “चयन समिति में यदि कलाकार नहीं होंगे, तो गुणवत्ता और गरिमा पर असर अवश्य पड़ेगा, यह केवल आयोजन नहीं, एक सांस्कृतिक उत्तराधिकार है।”
जबकि महाराज चक्रधर कला साधक के कलाकारों कदरदान भी थे
अब यह समय ही बताएगा कि देवेंद्र प्रताप सिंह और उर्वशी देवी के परिवारवाद की यह नई पहल समारोह को नई ऊंचाइयों तक ले जा पाएगी या नहीं। लेकिन यह सवाल जरूर उठ खड़ा हुआ है,क्या चक्रधर समारोह जैसे सांस्कृतिक महोत्सव की आत्मा बिना कलाकारों के चयन समिति में बने रह पाएगी?










