प्रगति नगर में प्रशासन का ताडंव!  लाल निशान में देवों के देव महादेव..!!

रायगढ़। रायगढ़ में नए मरीन ड्राइव की सड़क के लिए आज प्रगति नगर, जेलपारा में तोड़फोड़ का पहला चरण शुरू हो गया, लगभग 20 मकान को जमीदोंज कर दिया गया है,आज की घटना के बाद मोहल्ले वासियों के चेहरे पर एक शमशान सी खामोशी थी, कुछ महिलाएं भर भर कर बद्दुआ दे रही थी! कुछ ट्रैक्टर में अपना सामान लोड कर रहे थे, तो कुछ अगले दिन अपनी बारी के आने का इंतजार में घर के बाहर ताक रहे है,मोहल्ले के कई घरों में लाल निशान लगे हैं, कल उनकी बारी है! लेकिन इसके साथ ही हिंदुओं के आराध्य देवता भगवान भोलेनाथ के भी मंदिर पर प्रशासन का लाल निशान है।



जब हम हमारी टीम के साथ वहां पहुंचे तो कुछ लोगों ने कहा कि क्या भगवान भोलेनाथ का मंदिर भी तोड़ दिया जाएगा..?? वहां पर हमें निगम के कुछ अधिकारी दिखे, हमने उनसे पूछा कि मंदिर में जो लाल निशान लगा है, उसके हिसाब से तो पूरा मंदिर ही जमीदोंज हो जाएगा, क्या मंदिर भी टूटेगा..? इस सवाल के जवाब से नानानुकुर करते नजर आए और कहा कि हम निगम से ही है,मगर दूसरे विभाग से हैं.. हमें नहीं मालूम! इस बारे में हमने कई लोगों से पूछताछ की मगर हमें कोई भी सीधा जवाब नहीं मिला।



जहां तक देखा जाए तो जिन-जिन जगहों पर लाल निशान लगे हैं,उनकी तोड़फोड़ तो आज हो गई। बचे लोगो के आशियाने की बारी कल आएगी! मंदिर में भी लाल निशान लगा है, आज नहीं तो कल क्या भोलेनाथ की भी बारी आएगी..?? फिलहाल सड़क के लिए आसपास लगे बड़े-बड़े पेड़ों को एक झटके में उखाड़ दिया गया, लोगो के आशियानो पर बुलडोजर चला दिया गया, तो फिर लगभग 600 स्क्वायर फीट में बने भगवान भोलेनाथ का मंदिर का क्या होगा..?  यह सवाल भी लोगो के जहन में हैं।



अभी रायगढ़ में हाल फिलहाल में धर्मांतरण और मंदिर को लेकर पार्टी विशेष और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं का रुख आक्रमण देखने को मिल रहा है! इस मामले में उनका क्या रुख होगा.. यह भी देखने वाली बात होगी; खामोशी रहेगी या मंदिर बचाने के लिए कोई सार्थक प्रयास भी किया जाएगा!



सवाल..??
लेकिन एक सवाल रह रहकर दिमाग में उठता है, अगर मंदिर को नहीं तोड़ना है तो मंदिर पर लाल निशान लगाया ही क्यू..? वह भी एक जगह नहीं दो-दो जगह! फिलहाल जिस रॉकेट स्पीड से 15 दिनों के भीतर यह कार्रवाई की गई। इस लोकतांत्रिक देश में उन्हें इतना मौका भी नहीं मिल पाया कि वह अपने कानूनी अधिकारों का ठीक तरीके से इस्तेमाल भी कर पाए! फिलहाल इससे वहां के रहवासियों का विश्वास तो टूट गया है, मगर शायद आस्था पर चोट लगना अभी बाकी हो..??