रायगढ़। जिले का सबसे बड़ा औद्योगिक समूह जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (JSPL) इन दिनों अपने प्रबंधन के एक विवादित आदेश को लेकर चर्चा में है, कर्मचारियों ने इसे “फतवा” करार देते हुए इसे खुला शोषण बताया है,आदेश के अनुसार, अब सभी कर्मचारियों को अपनी 8 घंटे की ड्यूटी से कम से कम 20 मिनट पहले आकर हाजिरी लगानी होगी और ड्यूटी खत्म होने के 20 मिनट बाद ही परिसर छोड़ने की अनुमति होगी।

हालांकि यह आदेश कुछ महीनों पहले लागू किया गया था, लेकिन अब इसका पालन सख्ती से करवाया जा रहा है,कर्मचारी बताते हैं,कि अगर वे ड्यूटी के 5 मिनट बाद भी चले जाते हैं, तो उन्हें एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (ED) के सामने स्पष्टीकरण देना पड़ता है,—even अगर उन्होंने पूरे 8 घंटे ईमानदारी से काम किया हो।
कर्मचारियों की चुप्पी और डर:
कई कर्मचारी निजी तौर पर बताते हैं, कि वे इस अन्यायपूर्ण नियम से बेहद परेशान हैं, लेकिन नौकरी जाने के डर से कुछ बोल नहीं पा रहे हैं, “घर का खर्चा, बच्चों की फीस और बूढ़े माँ-बाप की दवाइयां… यह सब सोचकर चुप रहना ही बेहतर लगता है”, एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा।
CSR की चमक और ग्राउंड रियलिटी:
वही कंपनी जो अखबारों में अपने CSR यानी कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी के नाम पर गरीबों की मदद, शिक्षा और स्वास्थ्य योजनाओं के बड़े-बड़े विज्ञापन देती है, उसके अंदर ही कर्मचारी खुद को ‘शोषण का शिकार’ मान रहे हैं।

श्रम विभाग की चुप्पी पर सवाल:
रायगढ़ का श्रम विभाग भी सवालों के घेरे में है, कर्मचारियों का आरोप है, कि विभाग कंपनी के मैनेजमेंट से अधिक नजदीकियां बढ़ाने में लगा है, बजाय उनके हितों की रक्षा करने के इस पूरे मामले पर अब तक किसी भी अधिकारी का बयान सामने नहीं आया है।
“ड्यूटी पहले, परिवार बाद में” वाला सिस्टम:…..?
प्रबंधन द्वारा दिए गए संकेत स्पष्ट हैं: “आपके घर में चाहे कोई बीमार हो, दुर्घटना हो गई हो या कोई निजी आपदा—आपकी प्राथमिकता सिर्फ ड्यूटी होनी चाहिए,नहीं तो नौकरी से हाथ धोने के लिए तैयार रहें।”

आगे क्या…..?
सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे से जुड़ी और भी कई परतें हैं, जिनमें श्रम विभाग की भूमिका और कुछ पुराने केस शामिल हैं, इस पूरे घटनाक्रम का अगला भाग जल्द ही सामने लाया जाएगा, जहां यह साफ होगा कि “दूध का दूध और पानी का पानी” कौन कर रहा है।

श्रम विभाग की खामोशी उठाती कई सवाल
जरा सोचिए… जब जिंदल जैसी ब्रांडेड कंपनी में भी आवाज उठाना मुमकिन नहीं, तो फिर आम मजदूरों की कौन सुनेगा..? क्योंकि कर्मचारीयों की मानें तो श्रम विभाग इस पूरे मामले चुप्पी साधे हुए हैं, कर्मचारियों की कई बार शिकायत के बाद भी श्रम विभाग अन देखा करना कई सवालों को जन्म देता हैं।
ड्यूटी पहले जिंदगी बाद में
कर्मचारियों का कहना हैं,कि कंपनी अपनी सोच हम सभी कर्मचारियों पर थोप रही हैं, घर में कोई बीमार हो उससे कंपनी को कोई लेना देना नहीं कर्मचारी को जो डीयुटी दी वो होनी चाहिए, नहीं तो आप काम मत आईये….










