बिना ग्राम सभा की सहमति, जिंदल उद्योग द्वारा जंगल कटाई पर ग्रामीणों का आक्रोश स्थानीय विधायक की निष्क्रियता से क्षेत्रवासियों में गुस्सा……

रायगढ़। तमनार क्षेत्र के जंगलों को जिंदल उद्योग द्वारा लगातार काटा जा रहा है, जिससे पर्यावरण पर गहरा संकट मंडरा रहा है,इस गंभीर स्थिति के बावजूद, स्थानीय जनप्रतिनिधि मौन बने हुए हैं,क्षेत्रवासी अपने जंगलों को बचाने के लिए धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज न तो जिला प्रशासन तक पहुंच रही है, और न ही जनप्रतिनिधि उनकी समस्याओं को सुनने को तैयार हैं।


ग्रामवासियों का आरोप है कि जनप्रतिनिधि केवल दिखावे के लिए उनके साथ खड़े होने का वादा करते हैं, जबकि अंदरखाने जिंदल उद्योग का समर्थन करते हैं, यह दोहरा रवैया आम जनता को भ्रमित और परेशान कर रहा है,तमनार क्षेत्र के लोगों ने अपने जनप्रतिनिधियों को बड़े भरोसे के साथ चुना था, लेकिन अब वही जनप्रतिनिधि उद्योगों के पक्ष में खड़े नजर आते हैं।


तमनार क्षेत्र में उद्योगों की स्थापना के बाद से लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं,सड़कें खराब हो रही हैं, प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है, किसानों की जमीनें छीनी जा रही हैं, और जंगलों की अवैध कटाई हो रही है,सड़क दुर्घटनाएं आम हो गई हैं, इन सबके बीच, स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता से लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है।


हाल ही में तमनार ब्लॉक के ग्राम नागरामुड़ा के पास स्थित 95 एकड़ के घने जंगल में कटाई का मामला सामने आया,वन विभाग ने रातों-रात करीब 5 एकड़ जंगल काट दिया, जैसे ही ग्रामवासियों को इसकी जानकारी मिली, उन्होंने मौके पर पहुंचकर कटाई को रोक दिया, ग्रामीणों का कहना है, कि न तो ग्राम पंचायत से सहमति ली गई, और न ही ग्राम सभा की बैठक हुई।


वन विभाग का दावा है, कि 95 एकड़ जंगल जिंदल उद्योग को लीज पर दिया गया है। सवाल उठता है कि जिला प्रशासन ने यह लीज कैसे और क्यों दी, जब ग्रामीणों की सहमति ही नहीं ली गई थी,
तमनार क्षेत्र की जनता अपने जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली से बेहद नाखुश है।

कई लोग तो जनप्रतिनिधियों से इस्तीफा देने की मांग कर रहे हैं और नए विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। स्थानीय विधायक की निष्क्रियता के कारण क्षेत्रवासियों में आक्रोश की चिंगारी फैल रही है,तमनार क्षेत्र के लोग अब जागरूक हो गए हैं और आने वाले विधानसभा चुनावों में अपने जनप्रतिनिधियों को जवाब देने की तैयारी कर रहे हैं, उनका कहना है कि जो नेता उनके हितों की अनदेखी करेगा, उसे सबक सिखाया जाएगा।


तमनार क्षेत्र के जंगल केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि वहां के लोगों के अस्तित्व का भी हिस्सा हैं, यदि समय रहते जंगलों की कटाई पर रोक नहीं लगाई गई और जनप्रतिनिधियों ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई, तो इसका असर क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय संतुलन पर पड़ेगा,जनता ने अब अपनी आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी है, और यह लड़ाई सिर्फ जंगल बचाने की नहीं, बल्कि अपने अधिकारों की रक्षा की भी है।