शब्दातीर डेस्क। सनातन धर्म में श्रावण मास को भगवान शिव की भक्ति के लिए विशेष माना गया, शास्त्रीय मान्यता है, कि सावन के महीने में भगवान शिव की उपासना से जीवन में सुख एवं समृद्धि की प्राप्ति तो होती ही है, मृतयोग के समान विपत्ति भी टल जाती है, सावन का महीना आज से शुरू हो रहा है, और ही सावन का पहला सोमवार भी है।
सावन का सोमवार बहुत ही खास माना जाता है,ऐसा माना जाता है कि इस दिन जप, तप और ध्यान करना बहुत अच्छा होता है, सोमवार का दिन चंद्र ग्रह का होता है,और चंद्रमा के नियंत्रक भगवान शिव होते हैं, इस दिन पूजा करने से न केवल चन्द्रमा बल्कि भगवान शिव की कृपा भी मिल जाती है।
कोई भी व्यक्ति जिसको स्वास्थ्य की समस्या हो, विवाह की मुश्किल हो या दरिद्रता छायी हो, अगर सावन के हर सोमवार को विधि पूर्वक भगवान शिव की आराधना करता है, तो तमाम समस्याओं से मुक्ति पा जाता है, सोमवार और शिव जी के सम्बन्ध के कारण ही मां पार्वती ने सोलह सोमवार का उपवास रखा था, सावन का सोमवार विवाह और संतान की समस्याओं के लिए अचूक माना जाता है।

प्रातः काल या प्रदोष काल में स्नान करने के बाद शिव मंदिर जाएं, घर से नंगे पैर जायें तथा घर से ही लोटे में जल भरकर ले जाएं. मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल अर्पित करें, भगवान को साष्टांग करें,वहीं पर खड़े होकर शिव मंत्र का 108 बार जाप करें,दिन में केवल फलाहार करें. सायंकाल भगवान के मन्त्रों का फिर जाप करें, तथा उनकी आरती करें,अगले दिन पहले अन्न वस्त्र का दान करें तब जाकर व्रत का पारायण करें।
भगवान शिव की पूजा के लिए और खास तौर से वैवाहिक जीवन के लिए सोमवार की पूजा की जाती है, अगर कुंडली में विवाह का योग न हो या विवाह होने में अडचने आ रही हों तो सावन के सोमवार पर पूजा करनी चाहिए,अगर कुंडली में आयु या स्वास्थ्य बाधा हो या मानसिक स्थितियों की समस्या हो तब भी सावन के सोमवार की पूजा उत्तम होती है,सावन के सोमवार को शिव जी की पूजा सर्वोत्तम होती है,इसमें मुख्य रूप से शिव लिंग की पूजा होती है, और उस पर जल तथा बेल पत्र अर्पित किया जाता है।
प्रयास करें कि शिव जी की पूजा प्रदोष काल में की जाए, इस समय शिवलिंग पर बेलपत्र और जल की धारा अर्पित करें, इसके बाद शिव जी के मंदिर में एक घी का दीपक जलाएं, इसके बाद शिवलिंग की परिक्रमा करें. शिव जी से मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें।










