केलो नदी को बनाया कचरा डम्पिंग यार्ड, संरक्षण के लिए जल सत्याग्रह कचरे से पटी है, नदी, पचरी के आसपास भी गंदगी का अंबार, बिना ट्रीटमेंट के छोड़ रहे गंदा पानी…….


रायगढ़।  केलो नदी को बचाने के लिए न तो किसी के पास कोई विजन है, और न ही कोई इच्छाशक्ति। जैसा चल रहा है,चलने दो, की धारणा ही जारी है। केलो नदी को शहर के लोगों ने अघोषित कचरा डंपिंग यार्ड बना दिया है।

पूरी नदी में कचरे और गंदगी का अंबार है, नदी की यह हालत देखकर केलो जल सत्याग्रह किया जा रहा है। देश के 351 सर्वाधिक प्रदूषित नदीखंडों में केलो नदी का 15 किमी का हिस्सा भी शामिल है,छग में पांच नदियों को इस सूची में रखा गया है, एनजीटी ने सभी राज्य सरकारों को सख्त निर्देश दिए थे,जिसके बाद नदी में शहर का गंदा पानी छोड़ने से ट्रीटमेंट के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया।

रायगढ़ में दो एसटीपी 25 एमएलडी और 7 एमएलडी स्थापित किया गया है, इसके बाद केलो नदी की ओर से मुंह मोड़ लिया गया, नदी के इस 15 किमी हिस्से में केवल गंदे पानी की मात्रा कम हुई हैं,इसके बाद भी चार स्पॉट पर नाली का पानी सीधे नदी में गिर रहा है,अभी भी पूरे शहर का सीवरेज वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में नहीं पहुंच रहा है।

इसके अलावा नदी किनारे से लेकर पुल के नीचे कचरा डाला जा रहा है, हर दस मीटर में नदी किनारे कचरा डाला गया है, किनारे रहने वाले मोहल्लों का पूरा कचरा केलो नदी में डाला जा रहा है,नदी के बीच में मलबा भी पड़ा हुआ है, जिसकी सफाई कई सालों से नहीं हुई है।
कयाघाट से लेकर खर्राघाट तक तो और भी खराब हालात हैं।

नदी में हर तरफ गंदगी ही दिखती है,इसकी वजह केलो नदी को लेकर कोई कार्ययोजना का नहीं होना है, एनजीटी ने कहा तब जाकर एसटीपी बनाए। जबकि केलो नदी के संरक्षण के लिए खुद से कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं, कयाघाट पुल के पास गंदे पानी के नाले को सीधे नदी से जोड़ा गया है, तेज बारिश में पूरा कचरा बहकर नदी में ही जाएगा, कचरे निकालकर वहीं बगल में रख रहे हैं।


किनारे रहने वाले डाल रहे ज्यादा कचरा – केलो नदी को गंदा करने में किनारे के मोहल्लों का ज्यादा हाथ है, सबके घरों का कचरा नदी में डाला जा रहा है, एक तरफ नगर निगम की रिपोर्ट है कि हर घर से कचरा कलेक्शन हो रहा है,तो फिर केलो नदी में कचरा कहां से आ रहा है, एनीकट में भी कचरा जाम है, पिछले दिनों पंचधारी में कचरे को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन भी दिया गया है, इतने समय में किसी भी अधिकारी ने कयाघाट से खर्राघाट तक भी दौरा नहीं किया है।


जल सत्याग्रह से होगा बदलाव – केलो महाआरती से नदी की तस्वीर नहीं बदली,अब केलो नदी को बचाने की मुहिम में जल सत्याग्रह किया जा रहा है,जागरूक नागरिक मिलकर 15 जून से इसकी शुरुआत कर रहे हैं, शायद अब केलो नदी को लेकर कोई योजना बने,नदी के बीच में पड़ी गंदगी, झाडिय़ों को साफ कर घाट स्थलों को भी साफ किया जाए,नदी किनारे के मोहल्लों को इस अभियान से जोडऩा होगा,नगर निगम और केलो परियोजना को मिलकर काम करना होगा।