“अपने नियम के खिलाफ ही किया है…’ ट्रांसफर के बाद वाली एसडीएम गगन शर्मा और भाजपा कार्यकर्ता महाकाल साहू की कॉल रेकॉर्डिंग वायरल! थाने में महाकाल साहू..

रायगढ़। छत्तीसगढ़ शासन ने 27 फरवरी को राज्य प्रशासनिक सेवा क्या अधिकारियों की ट्रांसफर लिस्ट जारी की थी। जिसके अनुसार रायगढ़ एसडीम गगन शर्मा का ट्रांसफर बस्तर में हुआ और मुंगेली एसडीएम प्रवीण तिवारी रायगढ़ के नए एसडीम होंगे। कल शाम आदेश जारी होते ही एसडीम गगन शर्मा के ट्रांसफर की बात आग की तरह फैलने लगी। कहीं खुशी तो कहीं गम का माहौल था।


अपने नियम के खिलाफ ही किया है केस चल रहा है हाईकोर्ट में

एसडीएम गगन शर्मा के ट्रांसफर की खबर के अगले दिन एक ऑडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ है। यह ऑडियो कथित रूप से एसडीएम गगन शर्मा और महाकाल साहू के बीच का है। महाकाल साहू एक भाजपा कार्यकर्ता भी है। इस ऑडियो में वह पहले महाकाल साहू एसडीएम को उनके बस्तर ट्रांसफर होने की बधाई देता है और यह भी कहता है कि पहले हम आपके आगे पीछे बहुत घूमते थे। अब आप यहां से चले जाएंगे तो हमारा काम हो जाएगा।

इस पर एसडीएम गगन शर्मा कहते हैं कि जो भी काम हुआ है नियमों के अनुसार हुआ है। जिस पर दूसरी तरफ से आवाज आती है कि अपने नियम के खिलाफ ही किया है। आपके खिलाफ कैसे चल रहा है हाई कोर्ट में!

वीडियो: महाकाल साहू और एसडीएम गगन शर्मा की बातचीत

फिलहाल शहर में इस ऑडियो की चर्चा चल ही रही थी कि खबर आई कि महाकाल साहू को चक्रधर नगर पुलिस उठाकर ले गई है।

इसी बीच अगले दिन महाकाल साहू ने एसडीएम के ट्रांसफर होने पर अपनी खुशी का इजहार करते हुए रायगढ़ कोर्ट में मिठाइयां बांटी और पटाखे फोड़े। जो आज रायगढ़ कोर्ट में चर्चा का विषय रहा। ऐसा शायद ही कभी देखने को मिला होगी किसी अधिकारी के ट्रांसफर के बाद किसी ने इस तरह का जश्न मनाया हो। हालांकि महाकाल साहू को थोड़ी देर बाद चक्रधर नगर थाना की पुलिस उठाकर ले गई। इस मामले में चक्रधर नगर पुलिस ने बताया कि तहसीलदार लोमश मिरी के शिकायत पर महाकाल साहू को पूछताछ के लिए चक्रधर नगर थाने लाया गया है।

हालांकि कुछ घंटे बाद खबर मिल रही है कि चक्रधर नगर थाने द्वारा महाकाल साहू को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया है।

चर्चा में रहा कार्यकाल
वैसे देखा जाए तो एसडीएम गगन शर्मा अपने दिए गए फैसलों के लिए काफी चर्चा में रहे हैं। बताया जाता है कि हाई कोर्ट में उनके फैसलों के खिलाफ कई मामले कतार में है। जिसमे कुछ मामले हाईकोर्ट अवमानना के भी हैं