आपसी गुटबाजी उठकर क्या सरकार बनायेंगी काग्रेंस …….?

चुनाव स्पेशल पार्ट 1

राशीद जमाल सिद्धिकी की कलम से

रायपुर । जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आता जा रहा है, कांग्रेस में गुटबाजी भी उबाल मारती नजर आ रही है, समय रहते नहीं संभाला गया तो कांग्रेस को भारी पड़ सकता है, 75 प्लस का दवा समझ से परे है, कई विधायक मंत्री की नैया पार लगाते नहीं दिख रही है, वहीं भाजपा एक करने में काफी सफल हुई है।

भाजपा ने जो 21 विधायकों की लिस्ट जारी हुई हैं, दिखाई दे रही है,बस्तर सरगुजा रायगढ़ बिलासपुर दूर कवर्धा व पंडरिया सीटों पर कांग्रेस ने विजय प्राप्त किया था, 68 सीटों पर विजय प्राप्त कर इतिहास रचा था, जिन 21 सीटों पर भाजपा प्रत्याशी घोषणा की है वहां किसी प्रकार की गुटबाजी नजर नहीं आ रही है ,वह प्रत्याशियों के चुनाव अभियान का पर्याप्त समय मिला है।

जो कि भाजपा के प्रत्याशियों के लिए मिल का पत्थर साबित होगा वहीं कांग्रेस अभी तक किसी भी विधानसभा प्रत्याशी को हरी झंडी भी नहीं दी है,कांग्रेस काफी गुटबाज़ी दिख रही है, क्या कांग्रेस अपनी साख बचा पायेगी, 75 पल्स का दावा समझ के परे है, मौजूदा विधयाक और कुछ मंत्री भी अपने को बचा पायगे ,कही न कही भाजपा मैदान में दिख रही है, ज़मीनी हक़ीक़त किया है, बस्तर एक तरफा जीते थे, सरगुजा संभाग में भी एक तरफ जीत हुई थी।

राजनादगांव 6 में 5 जीते थे बिलासपुर दुर्ग रायपुर कवर्धा पंडरिया सब पर कांग्रेस ने विजय हासिल किया था, 68 विधान सभ जीत कर इतिहास रचा था ,मगर अब क्या कांग्रेस दोहरा पायेगी यह सोचने की बात है।

जबकि भाजपा ने 21 विधानसभा में अपने प्रत्याशी की घोषणा कर दिए है, जिनको 90 दिन का एक लम्बा समय मिला है, वही कांग्रेस ने अभी तक किसी भी विधानसभा में प्रत्याशी की घोषणा नही की है ।

कांग्रेस को बहुत सोचना पड़ेगा खासतौर पर खैरागढ विधानसभा देखा जाए तो भाजपा ने विक्रांत सिंह को प्रत्याशी बनाकर कांग्रेस को सोच में डाल दिये है, कांग्रेस के पास कौन सा तुरूप का पत्ता है, खोलेंगे खैरागढ़ में बहुत सोच समझ कर प्रत्यशी देना पड़ेगा, जब यहाँ उप चुनाव हुआ था, मुख्यमंत्री यह बोला करते थे, कि चुनाव यह से भपेश बघेल लड़ रहे है ।

अगर जिले की घोषणा न करते तो कोमल जंघेल की जीत तय थी, विक्रांत सिंह वो चेहरा है, जिसको क्षेत्र की जनता अच्छे से पहचानती है, इन्हों ने नगर पंचायत नगर पालिका जनपद पंचायत जिला पंचायत चुनाव जीत कर सफर तय किया है,यहाँ तक पहुचने का सवाल यह उठता है ।

कांग्रेस अपनी सीट को बचा पायेगी,इसी तरह पंडरिया में भी कांग्रेस मुश्किल में डोंगरगढ़ बालोद खरसिया बिलासपुर दुर्ग ऐसी कई विधानसभा है, जहाँ कांग्रेस को मुश्किल हो सकती है, अगर पाटन की बात करे तो मुख्यमंत्री का क्षेत्र है,फिर भी टक्कर दिख रही है।

हो सकता है मुख्यमंत्री भुपेश बघेल 2 जगह से चुनाव मैदान में उतर सकते है, एक तो पाटनऔर दूसरी खैरागढ़ विधानसभा भी हो सकता है, देखा जाए तो कांग्रेस की सरकार ही बनेगी यह तो तय है मगर मुकाबला रहेगा, भाजपा के साथ काँटे का 50 से 55 पर कांग्रेस दिख रही है,बाकी टी कांग्रेस जब अपने पत्ते खोलेगी तो पता चलेगा,और अंत में ऐसा न हो जीते कोई भी लेकिन सरकार भाजपा बनायें……?