साहित्य अर्पण (अंतर्राष्ट्रीय काव्य मंच ) की छत्तीसगढ़ शाखा के तत्वाधान में आयोजित (काव्य गोष्ठी कौशल की बात ) का द्वितीय काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया,जिसका विषय सावन पर रखा गया था, बहुत ही सुन्दर विषय के साथ सुव्यस्थित आयोजन आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का आरम्भ , कार्यक्रम की संचालिका और छत्तीसगढ़ काव्य मंच की सचिव माया देवांगन जी द्वारा किया गया,कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में आदरणीय दिलीप टिकरिहा आमंत्रित थे,जो कि छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध लोकगायक के रूप में अंचल में जाने जाते हैं।

कार्यक्रम के विशिष्ठ अतिथि के रूप में आदरणीय रामसाय श्रीवास आमंत्रित थे, जो की पिछले चालीस वर्षो से साहित्य सृजन में संलग्न हैं,कार्यक्रम का आरम्भ करते हुए , मंच की संचालिका माया देवांगन द्वारा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं विशिष्ठ अतिथि और सभी रचनाकारों का स्वागत एवं अभिनन्दन किया गया,
तत्पश्चात कार्यक्रम की रूप रेखा आगे बढ़ाते हुए , मंच की अध्यक्षा सोनिया गोयल को मंच पर आमंत्रित किया गया। उनके द्वारा भी कार्यक्रम की शोभा बढ़ाते हुए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं विशिष्ठ अतिथि और सभी रचनाकारों का स्वागत एवं अभिनन्दन सुन्दर मुक्तक रखते हुए किया गया,तत्पश्चात मंच की अध्यक्षा सोनिया गोयल जी द्वारा कार्यक्रम का आरम्भ करते हुए , काव्य पाठ हेतु रीना मानिकपुरी जी को आमंत्रित किया गया , जिन्होंने काव्य गोष्ठी के विषय को सार्थक करते हुए सावन पर अपनी बहुत ही सुन्दर रचना प्रस्तुत की।

रीना द्वारा एक श्रृंगार भी रखा गया जो सभी के हृदय को छू गया। तत्पश्चात कार्यक्रम की अगली रचनाकारा हर्षिता मिश्रा को कार्यक्रम की संचालिका माया देवांगन जी द्वारा आमंत्रित किया गया। हर्षा मिश्रा जी ने अपने सुमधुर कंठ से भगवान शिव पर अपनी अनुपम रचना की प्रस्तुति दी। उनकी रचना से पूरा काव्य मंच भक्ति भाव से भर गया।

तत्पश्चात कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आदरणीय दिलीप टिकरिहा द्वारा रचनाकारों की रचनाओं पर टिप्पणी भी दी गयी,तत्पश्चात कार्यक्रम की श्रृंखला को आगे ले जाते हुए ,मंच की अध्यक्षा सोनिया गोयल जी द्वारा धनेश्वरी देवांगन धरा जी को काव्य पाठ के लिए आमंत्रित किया गया जिनके द्वारा सावन पर , बहुत ही सुन्दर गीत प्रस्तुत किया गया। (रिमझिम रिमझिम बुँदे बरसे ) गीत के द्वारा धरा जी ने पटल पर उपस्थित सभी रचनाकारों का ध्यान अपनी ओर केंद्रित किया।

कार्यक्रम को सुन्दर रूप देते हुए विशिष्ठ अतिथि रामसाय श्रीवास द्वारा उनकी रचनाएं रखी गयी। विषय को सार्थक करते हुए , उनके द्वारा सार छंद में ,
भोले बाबा की वंदना रखी गयी। ( धरती के पावन कण कण में गूंजे नाम तुम्हारा ) .के माध्यम से उन्होंने कार्यक्रम को शिवमय बना दिया।

काव्य की धारा को आगे ले जाते हुए कार्यक्रम की संचालिका माया देवांगन द्वारा , विभा सिन्हा को काव्य पाठ के लिए आमंत्रित किया गया,औरतों की मनोदशा प्रस्तुत करती उनकी रचना (शायद अपने मन में मैंने यह बात बांध ली है ), बहुत ही सुन्दर एवं भावप्रद रही।

हर रचनाकार के काव्य पाठ के उपरांत, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आदरणीय दिलीप टिकरिहा जी द्वारा की गयी टिप्पणी से वहाँ उपस्थित सभी रचनाकारों का मनोबल बढ़ रहा था,तत्पश्चात एक बार पुनः से हर्षा मिश्रा को काव्य पाठ के लिए आमंत्रित किया गया,उन्होंने अपने बहुत ही सुन्दर भजन के द्वारा कार्यक्रम से जुड़े सभी श्रोताओं का ध्यान भी अपनी ओर केंद्रित किया ।
उसके उपरांत मंच की अध्यक्षा सोनिया गोयल द्वारा मंच की संचालिका एवं सचिव माया देवांगन को काव्य पाठ के लिए आमंत्रित किया गया,जिन्होंने विषय की सार्थकता को बनाते हुए , सावन पर बहुत ही सुन्दर विरह रस से भरा गीत प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम की रूप रेखा की अंतिम घडी लगभग आ गयी थी,कार्यक्रम की अगली कड़ी में , साहित्य अर्पण की सी. इ. ओ. नेहा शर्मा जी द्वारा मंच की अध्यक्षा सोनिया गोयल जी को काव्य पाठ के लिए आमंत्रित किया गया। जिन्होंने विरह रस को साकार करते हुए ,अपनी रचना को रखा।
कार्यक्रम के अंत में ,कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आदरणीय दिलीप टिकरिहा को , कार्यक्रम की संचालिका माया देवांगन द्वारा काव्य पाठ हेतु आमंत्रित किया गया,छत्तीसगढ़ी भाषा शैली में, लोकगीत ( सावन महीना सुहावन लागे ना ) उनके द्वारा प्रस्तुत किया गया।
उनके इस गीत ले माध्यम से, कार्यक्रम की धारा में सभी रस सम्मिलित हो गए थे।

मुक्तक , छंद , गीत , रस , भाव से मिश्रित यह काव्य गोष्ठी का कार्यक्रम अपनी समाप्ति पर लगभग आ गया था,अंत में सभी रचनाकारों की शुभकामनाओं एवं विचारों के उपरांत काव्य गोष्ठी की समाप्ति की घोषणा कर दी गई।










