गुरु पूर्णिमा महा पर्व पर साधक गण गुरु से मिलने पहुंचे गुरु दरबार…..!!

साल्हेवारा। अध्यात्म जगत की गुरु और शिष्य की परंपरा वेद व्यास जी के समय से चला आ रहा है । गुरु पूर्णिमा का यह महापर्व गुरु और शिष्य की सालों की आंतरिक स्थिति को जोड़ती टटोलती है, कि शिष्य की अवस्था कहां तक पहुंची है, गुरु पूर्णिमा का यह दिन गुरु अपना भंडार शिष्यों पर न्योछावर कर शिष्य को परिपुर्ण करता है ।

रामाश्रम सत्संग मथूरा उप केन्द्र भिलाई सत्संग परिवार के सानिध्य में गुरु पूर्णिमा पर्व पर सेक्टर 6 अग्रसेन भवन में दो द्विवसिय आंतरिक सत्संग कार्यक्रम आयोजित किया गया,इस दो सिंटिग कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के परम पुज्य बाबू जी कुंजबिहारी सिंग आचार्य एवं परम पूज्य रुद्र प्रसाद मिश्र आचार्य पुज्य देवा साहू आचार्य पुज्य बक्सी साहब रायपुर वाले रामाश्रम सत्संग के सत्संगियों को गुरु पूर्णिमा पर प्रकाश डालते हुए।

गुरु और शिष्य का वर्षों से चली आ रही परंपरा को अध्यात्म पथ की राही के संबंध में सार गर्भित प्रवचन से गुरु पूर्णिमा पर्व का महत्व का वर्णन करते हुए कहा कि मनुष्य दो बंधनों के बीच झुलते रहता है, 1 माया मोह का बंधन 2 निष्काम प्रेम का बंधन जो माया के प्रलोभनों में फंस जाता है वो गुरु परंपरा का निर्वहन नहीं कर सकता लोभ लालच में आकर साधना पथ से पथ भ्रष्ट हो जाता है ।2 प्रेम का बंधन एक ऐसा बंधन है ,जिसके ऊपर यदि गुरु का प्रेम का बुंद पड़ जाता है।

वो प्रेम का बंधन बंध जाता है गुरु के सहारे अपने आप को सौप जाता है। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ आचार्य परम पुज्य कुंजबिहारी सिंग बाबू जी ने श्रद्धा और विश्वास पर जोर देते हुये कहा जब तक गुरु पर श्रद्धा और विश्वास नहीं होगा साधक शिष्य गण अपने गुरु को समझ नहीं पायेगे।रामायण का प्रसंग बताते हुये।

कहा संत तुलसीदास महराज जी ने लिखा है बंदऊ गुरु पद पदुम परागा सुरुची सुवास सरस अनुरागा गुरु के चरणों में जो प्रेम करता है उनके चरणों की पराग से जीवस सरस आंनद रस में डूबा रहता है गुरु पूर्णिमा पर्व पर गुरु अपनी आध्यात्मिक ज्ञान की भंडार से शिष्य को भर देता है मांग लो जितना मांगना है गुरु ईश्वर से भी ऊंची चीज है ।

जिस भक्त पर निगाह पड़ गई जीवन परिवर्तन हो जाता है शिष्य को मालामाल कर देता है ।रामाश्रम सत्संग मथूरा उप केन्द्र भिलाई गुरु पूर्णिमा पर्व पर हजारों साधकों ने शांति की गोद में सरोवर होते रहे ध्यान भजन प्रवचन प्रार्थना से आंनद की वर्षा होती रही वास्तव में यह पर्व गुरु और शिष्य का अटूट संबध बनाए रखने में राम बाण औषधि है।

रिपोर्टर चन्द्रभूषण यदु