पैसों की कमी की वजह से जच्चा बच्चा दोनों को खो दिया, परिजनों का आरोप है ,कि अस्पताल प्रबंधन ने इलाज को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई

दुर्ग । दुर्ग के जुनवानी में स्थित निजी मेडिकल कॉलेज श्री शंकराचार्य में इलाज के लिए बेमेतरा से आए निषाद परिवार ने पैसों की कमी की वजह से जच्चा बच्चा दोनों को खो दिया, परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने इलाज को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई, बस बिल भरने के लिये दबाव डालते रहे, मानवता को शर्मसार करते हुए डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ ने बच्चे को लगाया गया वेंटिलेटर निकाल दिया ।

किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में आयुष्मान कार्ड या राशन कार्ड से इलाज किये जाने के सरकारी दावे खोखले साबित हो रहे हैं, बेमेतरा में प्रसव के बाद बच्चे का ब्लड प्रेशर काफी कम होता जा रहा था, परिजनों को तत्काल किसी बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई।

श्री शंकराचार्य हॉस्पिटल लाए जाने पर आईसीयू में बच्चे को एडमिट कर दवाई दी जा रही थी और वेंटिलेटर पर रखा गया था, पर निषाद परिवार के द्वारा पैसों के ना होने से बिल ना दे पाने के कारण बच्चे को वेंटिलेटर से निकाल कर पिता शंकर निषाद को दे दिया गया, मात्र एक से दो घँटे के भीतर ही नवजात शिशु ने पिता के हाथों में दम तोड़ दिया ।

उक्त मामले की जानकारी पर स्मृति नगर चौकी पुलिस ने परिजनों का बयान लिया और मृत शिशु का मर्ग कायम कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया ।

क्या कहते है अधिकारी